बंदी को परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जा सकता है-जम्मू काश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू काशमीर हाईकोर्ट के नवीनतम निर्णय में, कहा गया है कि एक बंदी को 12 वीं कक्षा की परीक्षा में बैठने से रोका नहीं जा सकता है, जब तक कि ऐसी परिस्थितियाँ न हों जो बंदी की सुरक्षा के लिए प्रतिकूल हो।

ओमेर अकबर मीर बनाम यूटी जम्मू और कश्मीर के संक्षिप्त तथ्य इस प्रकार हैं

याचिकाकर्ता ने एक आवेदन दायर किया जिसके माध्यम से याची ने स्वंय को जिला जेल भद्रेवाह से जिला जेल बारामुला या सेंट्रल जेल, श्रीनगर में स्थानांतरित करने की मांग की, जिससे याची कक्षा 12 की परीक्षा, जोकि 22 सितंबर 2020 से शुरू होनी थी, में शामिल हो सके।

याचिकाकर्ता का तर्क


याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि कक्षा 12 वीं की परीक्षा के लिए संशोधित डेट शीट पहले ही जारी कर दी गई थी और अगर याचिकाकर्ता को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई, तो वह अपने करियर के एक वर्ष खो देगा। विपक्षी ने इस तथ्यकी पुष्टि की कि याची की परीक्षा 22 सितंबर 2020 से होगी।

हाईकोट का निर्णय


जम्मू काश्मीर हाईकोर्ट ने कहा कि हिरासत में रखे गए व्यक्ति को परीक्षा लेने से रोका नहीं जा सकता है, जब तक कि एसी परिस्थितियाँ न हो जिसमें स्वयं बंदी की सुरक्षा खतरे में आ सकती हो। इसके बाद, हाईकोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि वे 22 सितंबर 2020 से निर्धारित परीक्षा में बंदी-याची के उपस्थिति को सुगम बनाने के लिए अपेक्षित प्रबंध करें।

Case Details:

Title: Omer Akbar Mir vs. UT of J & K & Ors

Case No. CM No.561/2020 in WP (Crl) No. 617/2019

Date of Order: 21.09.2020

Quorum: Justice Mr. Sanjay Dhar

Appearances: Advocate B.A. Tak for the petitioner,  Asif Maqbool, Dy AG for the respondents

Download Law Trend App

Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles