अपील लंबित होने के बाद भी राजस्थान हाई कोर्ट से पैरोल दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज

सुप्रीम कोर्ट में यूएपीए प्रकरण में आरोपी व्यक्ति की अपील लंबित होने के बावजूद राजस्थान हाई कोर्ट से उसे पैरोल दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए साफ शब्दों में कहा,हाई कोर्ट ने पैरोल देकर गलती की है।

जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने उक्त टिप्पणी दोषी अरुण कुमार जैन की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की । यूएपीए मामले में दोषी ठहराया गया अरुण फिलहाल जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद है। अरुण ने पिता के स्वास्थ्य का हवाला देते हुए तीन महीने के लिए जमानत की गुहार लगाई थी। 

अरुण ने जमानत का यह आवेदन अक्टूबर 2018 में हाई कोर्ट द्वारा उसे दोषी ठहराए गे फैसले के विरुद्ध  लंबित विशेष अनुमति याचिका में दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस शाह ने कहा जब एसएलपी सुप्रीम कोर्ट में लंबित थी तो हाई कोर्ट ने आपको पैरोल कैसे दे दिया। हमे इस बात पर घोर आपत्ती है।

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आपको यहाँ आना चाहिए था। पीठ ने जमानत देने से स्पष्ट इनकार करते हुए दोषी को पैरोल के लिए हाई कोर्ट जाने को लेकर कड़ी फटकार लगाई। पीठ ने कहा, जब अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित थी तो आखिर पैरोल के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाया गया। पीठ ने यह भी पाया कि सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में भी दोषी को अंतरिम जमानत दी थी। 

जमानत अवधि पूर्ण होने के बाद उसने समर्पण किया। उसे पता था कि उसकी जमानत की अवधि और नही बढ़ सकती इसलिए उसने पैरोल के लिए हाई कोर्ट का रुख किया और वहाँ से इसे पैरोल मिल गई।

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