रांची की एक विशेष प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) अदालत ने बुधवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय कर दिए। मामला रांची के बरगाईं इलाके की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। आरोप तय होने के साथ अब इस मामले में ट्रायल शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए। उनके वकील संजीव सहाय ने पुष्टि की कि विशेष PMLA अदालत ने मुख्यमंत्री के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं और अब मामला ट्रायल के लिए आगे बढ़ेगा।
यह घटनाक्रम झारखंड हाईकोर्ट से सोरेन को राहत नहीं मिलने के बाद सामने आया। उन्होंने विशेष PMLA अदालत में चल रही कार्यवाही को चुनौती देते हुए आरोप तय करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की थी। उनकी ओर से यह भी कहा गया था कि प्रवर्तन निदेशालय की जांच पूरी होने तक आरोप तय करने की प्रक्रिया टाल दी जाए।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की डिवीजन बेंच ने की। सोरेन की ओर से सीनियर एडवोकेट एस नागमुथु पेश हुए, जबकि ED की ओर से ASGI एसवी राजू, सीनियर एडवोकेट अमित कुमार दास और एडवोकेट सौरभ कुमार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए।
ED के आरोप
मामला रांची के बरगाईं इलाके में स्थित 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि इस जमीन को अवैध रूप से हासिल किया गया और जमीन के रिकॉर्ड में हेरफेर तथा जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल के जरिए उसका ट्रांसफर किया गया।
ED ने इन कथित लेनदेन को अपनी व्यापक मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जोड़ा है।
हेमंत सोरेन लगातार इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं और इन्हें निराधार बताया है। अब ट्रायल के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से पेश किए जाने वाले सबूतों और दलीलों के आधार पर इन आरोपों की जांच होगी।
अन्य आरोपियों पर पहले तय हो चुके हैं आरोप
ED की जांच के बाद इस मामले में कुल 17 लोगों को आरोपी बनाया गया है। विशेष PMLA अदालत कई अन्य आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग चरणों में आरोप तय करने की प्रक्रिया पहले ही पूरी कर चुकी थी, जबकि सोरेन के खिलाफ आरोप तय होना बाकी था।
यह मामला कथित फर्जी जमीन सौदों, सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल से संबंधित आरोपों की जांच से जुड़ा है।
31 जनवरी 2024 को हुई थी गिरफ्तारी
हेमंत सोरेन को ED ने 31 जनवरी 2024 को जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी से पहले उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
बाद में झारखंड हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी और वह 28 जून 2024 को बिरसा मुंडा जेल से बाहर आए थे।
अब आरोप तय होने के बाद मामला विशेष PMLA अदालत में ट्रायल के चरण में पहुंचेगा। अभियोजन पक्ष अपने सबूत पेश करेगा और गवाहों से पूछताछ करेगा, जबकि बचाव पक्ष को आरोपों का विरोध करने का अवसर मिलेगा।

