क्या भारत में नहीं दिखेगा फीफा वर्ल्ड कप 2026? दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और प्रसार भारती से मांगा जवाब

फुटबॉल प्रेमियों के लिए एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। भारत में फीफा वर्ल्ड कप 2026 के प्रसारण को लेकर अनिश्चितता के बीच, दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार और प्रसार भारती को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

अदालत में एक याचिका दायर कर यह चिंता जताई गई है कि 11 जून से शुरू होने वाले इस वैश्विक टूर्नामेंट के लिए अब तक किसी भी भारतीय ब्रॉडकास्टर ने अधिकार (Broadcasting Rights) सुरक्षित नहीं किए हैं। जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 20 मई को अगली सुनवाई तय की है।

वकील अवधेश बैरवा द्वारा दायर इस याचिका में दलील दी गई है कि इतने बड़े खेल आयोजन तक पहुंच न होना नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन है। याचिकाकर्ता के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत सूचना प्राप्त करना अभिव्यक्ति की आजादी का हिस्सा है।

रिकॉर्ड बताते हैं कि 1998 के बाद से हर फीफा वर्ल्ड कप का भारत में किसी न किसी कमर्शियल चैनल पर प्रसारण हुआ है। हालांकि, 2026 का वर्ल्ड कप (जो अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में होना है) करीब होने के बावजूद अब तक किसी भी निजी ब्रॉडकास्टर ने इसके राइट्स नहीं खरीदे हैं।

याचिका में मांग की गई है कि केंद्र सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। अंतरिम राहत के तौर पर यह अपील की गई है कि कम से कम उद्घाटन मैच, क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल जैसे महत्वपूर्ण मुकाबलों के प्रसारण अधिकार प्रसार भारती के माध्यम से सुरक्षित किए जाएं। अंतिम राहत के रूप में सभी 104 मैचों के प्रसारण की मांग की गई है।

याचिका में कहा गया, “यह मामला अत्यंत जरूरी है। 9 मई 2022 की सरकारी अधिसूचना के तहत उद्घाटन मैच पहले से ही ‘राष्ट्रीय महत्व’ की श्रेणी में आता है। यदि अदालत ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो करोड़ों भारतीय प्रशंसक इस ऐतिहासिक पल को देखने से वंचित रह जाएंगे।”

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि क्या इस याचिका को जनहित याचिका (PIL) के तौर पर देखा जाना चाहिए। इसके जवाब में याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील ने तर्क दिया कि हालांकि टीवी पर मैच देखना कोई पूर्ण अधिकार नहीं हो सकता, लेकिन कोर्ट का एक “नज” (हस्तक्षेप) इस दिशा में बहुत कारगर साबित हो सकता है।

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फीफा वर्ल्ड कप 2026 का आयोजन 11 जून से 19 जुलाई तक होना है। अब सबकी निगाहें 20 मई की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सरकार और प्रसार भारती को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

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