हाल ही में, त्रिपुरा हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि एक प्रमाणित प्रति साक्ष्य अधिनियम की धारा 63 के तहत द्वितीयक साक्ष्य है जो विलेख के अस्तित्व, शर्तों और सामग्री को स्वीकार करता है, लेकिन इसके निष्पादन को नहीं। न्यायमूर्ति अरिंदम लोध की पीठ 31.03.2016 के निर्णय और सिविल जज गोमती द्वारा पारित डिक्री दिनांक 05.04.2016
