वास्तविक समझौते के बाद निजी वैवाहिक विवाद में आपराधिक कार्यवाही जारी रखने का कोई औचित्य नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने FIR रद्द की

दिल्ली हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक आपराधिक मामले में FIR और उससे जुड़ी आगे की कार्यवाही रद्द कर दी। जस्टिस रविंदर दुडेजा ने कहा कि जब पक्षकारों के बीच विवाद आपसी समझौते से सुलझ चुका हो, मामला मुख्य रूप से निजी प्रकृति का हो और उसमें कोई सार्वजनिक हित शामिल न हो, तो आपराधिक कार्यवाही जारी रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा। 61729092026CRLMM73102026_111451

याचिका भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 528 के तहत दायर की गई थी। इसमें 1 अक्टूबर 2024 को पुलिस स्टेशन जामिया नगर, दिल्ली में IPC की धाराओं 498A, 406 और 34 के तहत दर्ज FIR No. 362/2024 और उससे उत्पन्न सभी कार्यवाहियों को पक्षकारों के बीच हुए समझौते के आधार पर रद्द करने की मांग की गई थी। 61729092026CRLMM73102026_111451

वैवाहिक विवाद के बाद दर्ज हुई थी FIR

शिकायतकर्ता और याचिकाकर्ता नंबर 1 का विवाह 11 मार्च 2023 को मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। इस विवाह से कोई संतान नहीं हुई।

फैसले के अनुसार, आपसी स्वभाव संबंधी मतभेदों के कारण दोनों 28 सितंबर 2023 से अलग रहने लगे। इसके बाद शिकायतकर्ता ने दहेज की मांग को लेकर लगातार शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर FIR दर्ज हुई। 61729092026CRLMM73102026_111451

READ ALSO  तेलंगाना हाईकोर्ट ने मूसी रिवरफ्रंट विकास के लिए अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया

बाद में पुलिस ने IPC की धाराओं 498A, 506, 406, 509, 354C और 34 के साथ-साथ दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं 3 और 4 के तहत चार्जशीट दाखिल की। 61729092026CRLMM73102026_111451

मेडिएशन में हुआ समझौता

कार्यवाही के दौरान पक्षकारों को मेडिएशन के लिए भेजा गया। साकेत कोर्ट्स, दिल्ली के मेडिएशन सेंटर में दोनों पक्षों ने अपने विवाद को आपसी सहमति से सुलझा लिया। समझौते की शर्तों को 7 फरवरी 2026 के लिखित सेटलमेंट में दर्ज किया गया। 61729092026CRLMM73102026_111451

दोनों पक्षों के वकीलों ने हाईकोर्ट को बताया कि समझौते के अनुसार याचिकाकर्ता नंबर 1 और शिकायतकर्ता ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत खुला के जरिए तलाक ले लिया। यह समझौता 7 मार्च 2026 का था।

याचिकाकर्ता नंबर 1 ने समझौते के तहत तय पूरी रकम 1.50 लाख रुपये भी शिकायतकर्ता को दे दी थी। 61729092026CRLMM73102026_111451

दोनों पक्ष कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से मौजूद थे। उनकी पहचान उनके-अपने वकीलों और जामिया नगर पुलिस स्टेशन के जांच अधिकारी SI विकेंद्र ने की।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट: गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी न देना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है

शिकायतकर्ता ने कोर्ट के सामने पुष्टि की कि समझौता किसी दबाव, भय या जबरदस्ती के बिना हुआ है। उसने यह भी बताया कि उसे पूरी समझौता राशि और संबंधित सामान मिल चुका है तथा FIR रद्द किए जाने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है। 61729092026CRLMM73102026_111451

आपराधिक कार्यवाही जारी रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य नहीं: हाईकोर्ट

समझौते और शिकायतकर्ता के बयान को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा:

“पक्षकारों के बीच हुए समझौते को देखते हुए आपराधिक कार्यवाही जारी रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा, खासकर तब जब विवाद में कोई सार्वजनिक हित शामिल नहीं है और यह मुख्य रूप से निजी प्रकृति का है।”

कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि शिकायतकर्ता स्वयं याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आरोपों को आगे नहीं बढ़ाना चाहती। 61729092026CRLMM73102026_111451

इसके बाद हाईकोर्ट ने माना कि BNSS की धारा 528 के तहत निहित शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए FIR रद्द करना उचित होगा।

READ ALSO  जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने लद्दाख में कुत्ते के काटने के मामलों में वृद्धि के संबंध में कदम उठाने के लिए अधिकारियों को नोटिस जारी किया

FIR और उससे जुड़ी कार्यवाही रद्द

हाईकोर्ट ने 1 अक्टूबर 2024 को PS जामिया नगर में IPC की धाराओं 498A, 406 और 34 के तहत दर्ज FIR No. 362/2024 और उससे उत्पन्न सभी कार्यवाहियों को रद्द कर दिया। 61729092026CRLMM73102026_111451 61729092026CRLMM73102026_111451

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि पक्षकारों के मूल हलफनामे ट्रायल कोर्ट में जमा किए जाएं, ताकि वे ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड का हिस्सा बन सकें। इन्हें चार सप्ताह के भीतर संबंधित SHO या जांच अधिकारी के समक्ष भी जमा करना होगा।

इसके साथ ही याचिका स्वीकार करते हुए निस्तारित कर दी गई।

केस टाइटल: मोहम्मद कासिम एवं अन्य बनाम स्टेट ऑफ गवर्नमेंट ऑफ NCT ऑफ दिल्ली एवं अन्य
केस नंबर: CRL.M.C. 7310/2026
बेंच: जस्टिस रविंदर दुडेजा
तारीख: 29 सितंबर 2026 

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles