दिल्ली हाईकोर्ट ने एक साइबर फ्रॉड मामले में आरोपी को नियमित जमानत दे दी है। जस्टिस गिरीश कठपालिया ने यह आदेश उस स्थिति में पारित किया, जब अभियोजन ने कहा कि उसे आरोपी को समानता के सिद्धांत पर जमानत दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। मामले में कई सह-आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया था, जबकि वर्तमान आरोपी हिरासत में था।
आरोपी ने नई दिल्ली जिले के पीएस साइबर में दर्ज एफआईआर नंबर 07/2026 में नियमित जमानत की मांग की थी। मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 112(2), 317(2), 318(4) और 61(2) के तहत दर्ज किया गया था।
क्या था आरोप
अभियोजन के अनुसार, आरोपी कथित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा था और ठगी की गई रकम का एक लाभार्थी था।
अभियोजन का मामला था कि कथित रूप से ठगी की गई रकम एक ऐसे बैंक खाते में आई थी, जो वर्तमान आरोपी और सह-आरोपी सलीम के नाम पर संयुक्त रूप से था।
सह-आरोपियों की गिरफ्तारी न होना जमानत का प्रमुख आधार
जमानत याचिका में प्रमुख आधारों में से एक यह था कि सह-आरोपी सलीम के साथ-साथ एच.एस. कोहली, संदीप, नसीम और संतोष को गिरफ्तार नहीं किया गया था।
आरोपी की ओर से दलील दी गई कि जब एक ही मामले में कई आरोपी हैं, तो गिरफ्तारी के मामले में पुलिस को अपनी मर्जी से कुछ आरोपियों को चुनने और अन्य को छोड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। आदेश में इस दलील को इस तरह दर्ज किया गया:
“The police cannot be allowed to pick and choose when it comes to arresting an accused.”
हाईकोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि 25 अगस्त 2026 के अपने पिछले आदेश में जांच अधिकारी की ओर से यह बताया गया था कि उसने सह-आरोपी सलीम को गिरफ्तार करने का फैसला किया था, लेकिन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने उसे ऐसा नहीं करने को कहा।
इस पहलू पर कोर्ट ने संबंधित डीसीपी से विस्तृत और अपडेटेड स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। हालांकि, सुनवाई के समय तक वह रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई थी। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पिछले आदेशों में दर्ज परिस्थितियों की गंभीरता के बावजूद अपडेटेड रिपोर्ट पेश नहीं हुई।
राज्य ने जमानत का विरोध नहीं किया
सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से पेश एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने जांच अधिकारी एसआई कोमल और पीएस साइबर, नई दिल्ली के एसएचओ इंस्पेक्टर मनीष वर्मा से निर्देश लेने के बाद कोर्ट को बताया कि अभियोजन को वर्तमान आरोपी को नियमित जमानत दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है।
कोर्ट ने दर्ज किया कि इन परिस्थितियों में राज्य ने समानता के सिद्धांत पर आरोपी को जमानत देने पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
₹25 हजार के निजी मुचलके पर जमानत
हाईकोर्ट ने जमानत याचिका स्वीकार करते हुए आरोपी को ₹25,000 के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत पेश करने की शर्त पर रिहा करने का निर्देश दिया। जमानत ट्रायल कोर्ट या ड्यूटी मजिस्ट्रेट की संतुष्टि के अधीन होगी।
कोर्ट ने आदेश की प्रति तुरंत संबंधित जेल अधीक्षक को भेजने का भी निर्देश दिया, ताकि आरोपी को इसकी जानकारी दी जा सके।
केस टाइटल: Mr X v. State NCT of Delhi
केस नंबर: BAIL APPLN. 2854/2026
बेंच: जस्टिस गिरीश कठपालिया
तारीख: 29 सितंबर 2026

