दिल्ली हाईकोर्ट इंजीनियर राशिद की याचिका उसी पीठ को स्थानांतरित करने को तैयार, जिसने पहले बजट सत्र में सुनी थी याचिका

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को संकेत दिया कि वह लोकसभा सांसद और यूएपीए आरोपी इंजीनियर राशिद (अब्दुल राशिद शेख) की उस याचिका को स्थानांतरित करने को तैयार है, जिसमें उन्होंने संसद के मानसून सत्र में भाग लेने के लिए ट्रायल कोर्ट द्वारा लगाए गए यात्रा खर्च वहन करने की शर्त को हटाने की मांग की है। अदालत ने कहा कि यह याचिका उसी पीठ के समक्ष सुनी जानी चाहिए जिसने बजट सत्र के दौरान इसी प्रकार की याचिका पर पहले से विचार किया था।

न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति मिमी पुष्कर्णा की पीठ ने कहा, “जब पहले से ही एक पीठ ने इस विषय पर विचार कर निर्णय लिया है, तो हमारे लिए इस मामले की सुनवाई करना उचित नहीं होगा।” पीठ ने इंजीनियर राशिद के वकील से कहा कि वे पहले दायर संशोधन याचिका को ही आगे बढ़ाएं, जो सभी आगामी सत्रों पर लागू हो सकती है।

अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन की अनुपस्थिति के कारण सुनवाई को 31 जुलाई तक स्थगित कर दिया।

गौरतलब है कि 15 मई को न्यायमूर्ति सी.डी. सिंह (जो अब इलाहाबाद हाईकोर्ट वापस जा चुके हैं) और न्यायमूर्ति अनुप जयराम भंभानी की पीठ ने बजट सत्र में भाग लेने के लिए राशिद को लगभग ₹4 लाख ट्रैवल खर्च के रूप में जेल प्रशासन को जमा कराने का निर्देश दिया था। अब मानसून सत्र की याचिका की सुनवाई के लिए नई पीठ का गठन आवश्यक होगा क्योंकि न्यायमूर्ति सिंह अब दिल्ली हाईकोर्ट में नहीं हैं।

22 जुलाई को एक विशेष एनआईए अदालत ने राशिद को 24 जुलाई से 4 अगस्त तक संसद सत्र में भाग लेने की अनुमति दी थी, लेकिन शर्त रखी थी कि वे ट्रैवल खर्च खुद वहन करें, शाम तक वापस जेल लौटें और मीडिया से संपर्क के लिए मोबाइल फोन आदि का प्रयोग न करें।

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राशिद ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ₹1.44 लाख प्रतिदिन की मांग और ₹17 लाख के बिल को चुनौती दी, यह कहते हुए कि यह उनके सांसद के रूप में कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा बन रहा है। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि उन्हें 21 अगस्त तक सभी सत्रों में भाग लेने की अनुमति दी जाए या फिर उन्हें अंतरिम जमानत दी जाए।

एनआईए ने सोमवार को दायर अपने 17-पृष्ठीय हलफनामे में याचिका का विरोध करते हुए कहा कि “सार्वजनिक कर्तव्य” के नाम पर एक आरोपी को यात्रा और सुरक्षा लागत से मुक्त नहीं किया जा सकता। विशेष लोक अभियोजक अक्षय मलिक और वकील खावर सलीम के माध्यम से दायर हलफनामे में कहा गया, “आरोपी द्वारा इन लागतों का वहन करना परिस्थितियों में उचित और न्यायसंगत है।”

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एनआईए ने यह भी बताया कि राशिद पहले ही बजट सत्र के दौरान छह बार संसद जाने के लिए तिहाड़ जेल प्रशासन को ₹4.37 लाख से अधिक (मांग की गई राशि का 50%) जमा कर चुके हैं।

2019 में यूएपीए के तहत गिरफ्तार इंजीनियर राशिद जम्मू-कश्मीर की अवामी इतिहाद पार्टी (AIP) के अध्यक्ष हैं। एनआईए ने आरोप लगाया है कि वे उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने पाकिस्तान की आईएसआई और आतंकी संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद और हिंसा को बढ़ावा देने के लिए हवाला के जरिए फंडिंग की।

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अब यह मामला 31 जुलाई को फिर से अदालत के समक्ष आएगा।

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