फुटपाथ पर सोना लापरवाही नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने हादसा पीड़ितों का मुआवजा दोगुना किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक फैसले में स्पष्ट किया है कि सड़क किनारे फुटपाथ पर सोना पीड़ित की ओर से अंशदायी लापरवाही (कंट्रीब्यूटरी नेग्लिजेंस) नहीं माना जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने साल 2015 के एक सड़क हादसे के पीड़ितों और उनके परिजनों का मुआवजा आधा घटाने वाले ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि वह सभी दावेदारों को छह सप्ताह के भीतर पूरी मुआवजा राशि का भुगतान करे।

मुआवजे की नई राशि

जस्टिस अनीश दयाल की पीठ ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) द्वारा मुआवजे में की गई 50 फीसदी की कटौती को कानूनी रूप से अमान्य करार दिया। इस फैसले के बाद हादसे में जान गंवाने वाले दो लोगों के परिजनों को लगभग 10-10 लाख रुपये का पूरा मुआवजा मिलेगा। वहीं, दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए दो अन्य पीड़ितों को क्रमशः 1,20,005 रुपये और 18,10,569 रुपये की मुआवजा राशि दी जाएगी। यह निर्णय 8 जुलाई को सुनाया गया, जो पीड़ितों और मृतकों के परिवारों द्वारा दायर अपीलों पर आया है।

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चालक की जिम्मेदारी और सामाजिक सच्चाई

अदालत ने कहा कि फुटपाथ पर वाहन चलाना कानून के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित है और चालकों की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वे पैदल यात्रियों के लिए निर्धारित क्षेत्रों के पास अधिक सावधानी बरतें। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि जब कोई व्यक्ति मजबूरीवश फुटपाथ पर चल रहा हो, खड़ा हो या विश्राम कर रहा हो, तो उससे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह फुटपाथ पर किसी वाहन के आ जाने की आशंका रखेगा।

देश की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए जस्टिस दयाल ने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में लोग बेघर हैं, रात में काम करते हैं या निर्माण स्थलों पर मजदूरी करते हैं, जिनके पास सोने का कोई पक्का स्थान नहीं होता। ऐसे लोगों के लिए फुटपाथ ही विश्राम की अपेक्षाकृत सुरक्षित जगह बन जाती है। अदालत ने कहा कि भले ही फुटपाथ पर सोना एक जोखिम भरा कदम हो, लेकिन इसे कानूनन पीड़ितों की लापरवाही करार नहीं दिया जा सकता।

2015 के हादसे की पृष्ठभूमि

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यह मामला अक्टूबर 2015 का है, जब तड़के करीब 4:30 बजे मादीपुर मेट्रो स्टेशन के नीचे फुटपाथ पर सो रहे चार लोगों को एक तेज रफ्तार ट्रक ने कुचल दिया था। इस भीषण दुर्घटना में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। ट्रिब्यूनल ने पीड़ितों पर 50 प्रतिशत अंशदायी लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुआवजा राशि आधी कर दी थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने पूरी तरह बहाल कर दिया है।

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