दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण मानहानि मामले की सुनवाई करते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी, हिमानी पुरी के खिलाफ ऑनलाइन उपलब्ध कथित अपमानजनक सामग्री को तुरंत हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने उन रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स पर कड़ा रुख अपनाया है, जिनमें हिमानी पुरी का नाम सजायाफ्ता यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ जोड़ा गया था।
जस्टिस मिनी पुष्करणा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी प्रतिवादियों को 24 घंटे के भीतर संबंधित लेख, सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो हटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारत के आईपी एड्रेस से अपलोड की गई सामग्री को पूरी तरह हटाना होगा, जबकि भारत के बाहर से अपलोड की गई सामग्री को भारतीय डोमेन में ब्लॉक करना अनिवार्य होगा।
हिमानी पुरी द्वारा दायर मानहानि याचिका के अनुसार, 22 फरवरी 2026 से उनके खिलाफ एक सुनियोजित अभियान शुरू किया गया था। इस अभियान के तहत एक्स (पूर्व में ट्विटर), यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और लिंक्डइन जैसे प्लेटफॉर्म्स पर झूठे और भ्रामक लेख प्रसारित किए गए।
न्यूयॉर्क की निवासी हिमानी पुरी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि सनसनीखेज और हेरफेर भरे तरीके से उनके खिलाफ आधारहीन दावे किए गए। इसमें छेड़छाड़ किए गए वीडियो (doctored videos) और भ्रामक थंबनेल का इस्तेमाल किया गया ताकि जनता के बीच आक्रोश पैदा किया जा सके। उनके वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने तर्क दिया कि उन्हें केवल इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री की बेटी हैं।
सुनवाई के दौरान वादी के वकील ने अपमानजनक सामग्री को वैश्विक स्तर पर (Global Takedown) हटाने की मांग की। हालांकि, गूगल और मेटा जैसे सोशल मीडिया मध्यस्थों (Intermediaries) के वकीलों ने इस मांग का विरोध किया। मेटा की ओर से पेश वकील अरविंद दातार ने दलील दी कि क्या भारतीय अदालतों के पास वैश्विक स्तर पर कंटेंट हटाने का निर्देश देने का अधिकार क्षेत्र है, यह मामला अभी हाईकोर्ट की खंडपीठ (Division Bench) के समक्ष लंबित है।
कोर्ट ने फिलहाल वैश्विक स्तर पर कंटेंट हटाने का आदेश नहीं दिया, लेकिन भारतीय अधिकार क्षेत्र के भीतर सख्त निर्देश जारी किए। दूसरी ओर, यूट्यूब चैनल ‘जन गण मन 24×7’ के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए इसे “पत्रकारिता की स्वतंत्रता” बताया। उन्होंने दावा किया कि वे केवल अन्य प्रतिवादियों के ट्वीट के आधार पर सवाल उठा रहे थे और यह “फेयर जर्नलिज्म” के दायरे में आता है।
कोर्ट का निर्देश
जस्टिस मिनी पुष्करणा ने अपने आदेश में तकनीकी कार्यान्वयन को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं:
- भारतीय आईपी एड्रेस: भारत के भीतर से अपलोड की गई सभी अपमानजनक सामग्री को तुरंत और पूरी तरह से हटाना होगा।
- विदेशी आईपी एड्रेस: जो सामग्री भारत के बाहर से अपलोड की गई है, सोशल मीडिया कंपनियों को उसे भारतीय डोमेन में ब्लॉक करना होगा ताकि उसे भारत में न देखा जा सके।
- मध्यस्थों की जिम्मेदारी: यदि मुख्य प्रकाशक 24 घंटे के भीतर कंटेंट नहीं हटाते हैं, तो गूगल और मेटा जैसे प्लेटफॉर्म्स को उन यूआरएल (URLs) और लिंक्स को ब्लॉक करना होगा।
हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को समन जारी किया है और मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त, 2026 के लिए तय की है।

