FIITJEE Case: दिल्ली हाईकोर्ट का कड़ा रुख, ED को अपनी वेबसाइट से हटानी होगी ‘विवादास्पद’ प्रेस रिलीज

दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कोचिंग संस्थान FIITJEE के खिलाफ जारी की गई एक पुरानी प्रेस रिलीज को अपनी आधिकारिक वेबसाइट से हटाने का आदेश दिया है। अदालत ने पाया कि इस प्रेस रिलीज में ऐसी ‘नकारात्मक और पूर्वग्रही’ (judgmental) टिप्पणियां की गई थीं, जो सरकारी दिशानिर्देशों का उल्लंघन करती हैं।

न्यायूमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने 6 मई को इस मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। ED द्वारा प्रेस रिलीज को स्वेच्छा से वापस लेने की सहमति जताने के बाद, अदालत ने जांच एजेंसी को यह प्रक्रिया पूरी करने के लिए सात दिनों का समय दिया है।

यह कानूनी विवाद पिछले साल ED द्वारा जारी एक प्रेस रिलीज से शुरू हुआ था। कोचिंग संस्थान FIITJEE ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि जांच एजेंसी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर प्रेस रिलीज में कई ‘धारणाओं और अनुमानों’ को शामिल किया है। संस्थान का तर्क था कि रिलीज की भाषा केंद्रीय गृह मंत्रालय के 2010 के उस कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) का उल्लंघन है, जो जांच एजेंसियों को मीडिया ब्रीफिंग के दौरान संयमित रहने का निर्देश देता है।

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सुनवाई के दौरान अदालत ने उल्लेख किया कि प्रेस रिलीज में इस्तेमाल की गई भाषा प्रथम दृष्टया ‘जजमेंटल’ प्रतीत होती है। गृह मंत्रालय के नियमों के अनुसार, जांच एजेंसियों को किसी भी चल रहे मामले में मीडिया को जानकारी देते समय राय बनाने या आरोपी के खिलाफ पूर्वाग्रही बयान देने से बचना चाहिए।

ED ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि प्रेस रिलीज में दी गई जानकारी जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सबूतों का एक सारांश थी। एजेंसी का दावा था कि उनकी जांच में एक ‘बड़े स्तर की साजिश और धोखाधड़ी’ का खुलासा हुआ है, जिसके कारण विभिन्न राज्यों में कई FIR दर्ज की गई हैं।

हालांकि, जस्टिस कौरव ने स्पष्ट किया कि अदालत फिलहाल जांच के गुण-दोष या आरोपों की गंभीरता पर फैसला नहीं सुना रही है। अदालत का पूरा ध्यान केवल इस बात पर था कि क्या जांच एजेंसी द्वारा जारी किया गया सार्वजनिक बयान गृह मंत्रालय के प्रोटोकॉल के अनुरूप था या नहीं।

ED के वकील ने अदालत को सूचित किया कि विभाग बिना किसी औपचारिक अदालती आदेश के इस प्रेस रिलीज को वेबसाइट से हटाने के लिए तैयार है। इसके बाद, अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा, “प्रतिवादी (ED) को आज से 7 दिनों के भीतर आवश्यक कदम उठाने दें।”

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यह फैसला उन दिशानिर्देशों की अहमियत को रेखांकित करता है जिनका उद्देश्य जांच के दौरान किसी भी व्यक्ति या संस्था की प्रतिष्ठा की रक्षा करना है, जब तक कि अदालत द्वारा अंतिम फैसला न सुना दिया जाए।

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