कर्नाटक की विशेष अदालत ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के परिवार से जुड़े सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को सरकारी जमीन आवंटित किए जाने के मामलों में लोकायुक्त पुलिस से जांच कराने की मांग वाली निजी शिकायतों पर कार्यवाही रोक दी है। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 18 नवंबर की तारीख तय की है।
जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत ने शनिवार को यह फैसला सरकारी वकील की ओर से जानकारी दिए जाने के बाद लिया कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने मामले में आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
इससे पहले 16 अक्टूबर को कर्नाटक हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने अपना 18 अगस्त का आदेश वापस ले लिया था। उस आदेश में विशेष अदालत को लोकायुक्त पुलिस से जांच कराने की मांग पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया गया था।
हाईकोर्ट में मामले की अगली सुनवाई सोमवार दोपहर निर्धारित है।
सुनवाई का अवसर नहीं मिलने पर हाईकोर्ट ने वापस लिया आदेश
मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे और सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट के ट्रस्टी राहुल खड़गे ने हाईकोर्ट में आवेदन देकर कहा था कि 18 अगस्त का आदेश पारित करने से पहले ट्रस्ट को न तो नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर मिला।
राहुल खड़गे ने दलील दी कि उन्हें आपराधिक याचिका से जुड़े कानूनी और प्रक्रियात्मक मुद्दों पर अदालत के समक्ष अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों और दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 362 का उल्लेख करते हुए हाईकोर्ट ने माना कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन होने पर न्यायिक आदेश वापस लेने पर लागू प्रतिबंध पूर्ण नहीं है।
2010 और 2014 में हुए जमीन आवंटन पर विवाद
भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता विजयराघव मराठे ने दो अलग-अलग सरकारी जमीन आवंटनों की जांच भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत लोकायुक्त पुलिस से कराने की मांग करते हुए निजी शिकायतें दाखिल की हैं।
पहला मामला वर्ष 2010 का है। उस समय बी.एस. येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के दौरान बेंगलुरु विकास प्राधिकरण (BDA) ने बीटीएम IV स्टेज में 8,001 वर्गमीटर का नागरिक सुविधा भूखंड आवंटित किया था।
अनुसूचित जाति (SC) कल्याण के लिए शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने के उद्देश्य से यह जमीन 50 प्रतिशत रियायत पर एक करोड़ रुपये में दी गई थी। वर्तमान में इसकी कीमत 10 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीन का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए नहीं किया गया।
यह भूखंड एक अलग कानूनी विवाद में भी शामिल है। वर्ष 2021 में हाईकोर्ट ने मूल भूमि अधिग्रहण को रद्द कर दिया था। हालांकि, ट्रस्ट ने अपने भूखंड के संबंध में स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया था।
दूसरा मामला वर्ष 2014 का है, जब सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड (KIADB) ने बेंगलुरु के पास हाईटेक डिफेंस एयरोस्पेस पार्क में अनुसूचित जाति कोटे के तहत पांच एकड़ नागरिक सुविधा भूमि आवंटित की थी।
इस आवंटन को लेकर भाजपा ने भाई-भतीजावाद और हितों के टकराव के आरोप लगाए थे। इसके बाद कांग्रेस मंत्री प्रियांक खड़गे ने बताया था कि ट्रस्ट ने अगस्त 2024 में स्वेच्छा से पांच एकड़ जमीन वापस कर दी थी।
विशेष अदालत ने पहले पुलिस जांच के बजाय खुद जांच करने का फैसला किया था
विशेष अदालत ने 11 अगस्त को शिकायत में प्रक्रियात्मक कमियों के आधार पर पुलिस जांच का आदेश देने के बजाय स्वयं न्यायिक जांच करने का फैसला किया था। इन कमियों में आवश्यक कानूनी हलफनामा दाखिल नहीं किया जाना भी शामिल था।
विजयराघव मराठे ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
इसके बाद हाईकोर्ट ने 18 अगस्त को विशेष अदालत को प्रक्रियात्मक कमियां दूर कर लोकायुक्त पुलिस से जांच कराने की मांग पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया था।
इस निर्देश के आधार पर विशेष अदालत ने 18 सितंबर को राज्य लोकायुक्त पुलिस से जवाब मांगा था।
हालांकि, हाईकोर्ट द्वारा 18 अगस्त का आदेश वापस लिए जाने के बाद विशेष अदालत में आगे की कार्यवाही फिलहाल रुक गई है। अब मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।
