एचबीओ कंटेंट की अवैध स्ट्रीमिंग पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 30 वेबसाइट्स पर रोक के निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने मीडिया दिग्गज एचबीओ (HBO) की कॉपीराइट फिल्मों और वेब सीरीज की अवैध स्ट्रीमिंग करने वाली 30 वेबसाइटों को तत्काल ब्लॉक करने का आदेश दिया है। अदालत ने डिजिटल मध्यस्थों की कानूनी सीमाओं को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया है कि इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISP) और डोमेन नेम रजिस्ट्रार (DNR) की भूमिका केवल तकनीकी जांच तक ही सीमित है।

तकनीकी जांच तक सीमित रहेगी मध्यस्थों की भूमिका

जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने 27 जुलाई को पारित अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इंटरनेट सेवा प्रदाताओं या डोमेन नेम रजिस्ट्रारों के पास स्वविवेक से यह निर्णय लेने का अधिकार नहीं है कि कौन सी वेबसाइट ब्लॉक की जाए। न ही वे किसी निजी याचिका के आधार पर स्वतंत्र रूप से कोई प्रतिबंध लागू कर सकते हैं।

अदालत के अनुसार, यदि एचबीओ द्वारा किसी नई वेबसाइट को अवैध या ‘रोग’ (rogue) करार देकर ब्लॉक करने की मांग की जाती है, तो मध्यस्थों का काम केवल यह सत्यापित करना होगा कि वह वेबसाइट पहले से ब्लॉक की गई किसी साइट की मिरर, अल्फान्यूमेरिक या रीडायरेक्ट लिंक है या नहीं। तकनीकी पुष्टि होने के बाद मध्यस्थों को अदालत के अंतरिम आदेश का अनुपालन करना होगा।

धारा 79 और सेफ हार्बर सुरक्षा

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हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत मध्यस्थों को मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ (कानूनी ढाल) की सुरक्षा बनाए रखने के लिए उन्हें पूरी तरह से तटस्थ होकर काम करना होगा। वे केवल किसी कंपनी के कहने पर अपनी मर्जी से किसी साइट को बंद नहीं कर सकते।

इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी मध्यस्थ को लगता है कि एचबीओ के अनुरोध के बावजूद किसी वेबसाइट को ब्लॉक नहीं किया जाना चाहिए, तो वह इसके खिलाफ अदालत में अर्जी लगा सकता है। वहीं, अगर किसी वेबसाइट को लगता है कि उस पर गलत तरीके से प्रतिबंध लगाया गया है, तो उसे भी कोर्ट में चुनौती देने का पूरा अधिकार है।

पहचान छिपाकर पायरेसी करने का आरोप

मामले की सुनवाई के दौरान एचबीओ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता साईकृष्ण राजगोपाल ने कोर्ट को बताया कि ये 30 वेबसाइटें बिना किसी वैध अधिकार या लाइसेंस के एचबीओ की प्रीमियम सामग्री का प्रसारण कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ये प्लेटफॉर्म फिल्मों और शो को उनके आधिकारिक रिलीज के तुरंत बाद या कई मामलों में रिलीज से पहले ही गैरकानूनी तरीके से स्ट्रीम कर देते हैं।

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अदालत ने माना कि इन वेबसाइटों का प्राथमिक उद्देश्य कॉपीराइट उल्लंघन को बढ़ावा देना है और यह केवल अनजाने में हुआ उल्लंघन नहीं है। पीठ ने इस बात पर भी गौर किया कि इन वेबसाइटों के वास्तविक संचालकों ने कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए प्राइवेसी प्रोटेक्शन सेवाओं के जरिए अपनी पहचान छुपा रखी है।

लोकप्रिय शो की सुरक्षा

प्रतिवादी मध्यस्थों की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अदालत को आश्वस्त किया कि उन्हें चिन्हित अवैध वेबसाइटों को ब्लॉक करने के निर्देशों को लागू करने में कोई आपत्ति नहीं है। हाईकोर्ट के इस कदम से एचबीओ की विशाल प्रोडक्शन लाइब्रेरी को सुरक्षा मिलेगी, जिसमें ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’, ‘द सोप्रानोस’, ‘सक्सेशन’, ‘चेरनोबिल’, ‘द लास्ट ऑफ अस’ और ‘यूफोरिया’ जैसी विश्व प्रसिद्ध सीरीज शामिल हैं।

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