दिल्ली हाईकोर्ट की केंद्र को फटकार: “अगर कानून में समय सीमा नहीं है तो क्या पद खाली ही रहेंगे?”अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के आयोग में खाली पदों को भरने में ढिलाई पर नाराजगी, केंद्र से जवाब मांगा

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) में अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों को भरने के लिए अब तक उठाए गए कदमों का ब्योरा हलफनामे के रूप में दाखिल करे और यह भी बताए कि ये नियुक्तियाँ कब तक पूरी होंगी।

मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजसवी करिया की पीठ ने यह टिप्पणी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें आयोग में लंबे समय से खाली पदों को भरने की मांग की गई थी।

“कृपया अपने अधिकारियों को संवेदनशील बनाइए। ढाई साल से पद खाली हैं। क्या सिर्फ इसलिए कि कानून में समय सीमा नहीं है, आप केवल एक सदस्य के साथ आयोग चलाते रहेंगे?” – अदालत ने केंद्र के वकील से पूछा।

पीठ ने कहा कि यह तर्क कि चूंकि कानून में नियुक्तियों की कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है इसलिए अदालत इस बारे में निर्देश नहीं दे सकती – “पूरी तरह से भ्रमित करने वाला, अस्थिर और विधायी मंशा के विपरीत है।”

कोर्ट ने कहा कि आयोग को संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यकों को प्रदत्त मौलिक अधिकारों की रक्षा हेतु स्थापित किया गया है और इसकी कार्यप्रणाली केवल एक सदस्य के सहारे नहीं चल सकती।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन की एफआईआर को एक साथ जोड़ने की याचिका पर सुनवाई टाली

“ऐसा तर्क देना कि चूंकि अधिनियम में रिक्त पद भरने की कोई समय-सीमा नहीं है, इसलिए अदालत इस पर आदेश नहीं दे सकती, पूरी तरह से अव्यवहारिक और अस्वीकार्य है।”

केंद्र ने अपने जवाब में कहा था कि रिक्तियाँ आयोग के कार्यों में कोई बाधा नहीं डाल रहीं और कानून में रिक्तियों को भरने के लिए कोई निर्धारित समय नहीं है। अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा:

“विधायी मंशा को केवल इस आधार पर निष्क्रिय नहीं किया जा सकता कि अधिनियम में समय-सीमा नहीं है।”

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि NCMEI न केवल परामर्शदाता और प्रशासकीय बल्कि न्यायिक कार्य भी करता है। यह आयोग उन मामलों में अपीलीय प्राधिकारी है जहां किसी संस्थान को अल्पसंख्यक दर्जा देने या उससे हटाने का निर्णय होता है, और जहां अल्पसंख्यक संस्थान स्थापित करने की अनुमति से संबंधित विवाद हों।

READ ALSO  हाईकोर्ट ने केंद्र, दिल्ली सरकार से 100 रुपये से ऊपर के करेंसी नोटों को वापस लेने, 10,000 रुपये से अधिक के नकद लेनदेन को प्रतिबंधित करने की मांग की

“वर्तमान में आयोग केवल एक सदस्य के साथ कार्य कर रहा है, जबकि अधिनियम के अनुसार इसमें एक अध्यक्ष और तीन सदस्य होने चाहिए।”

कोर्ट ने शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई से पहले हलफनामा दाखिल करे जिसमें निम्नलिखित विवरण हों:

  • रिक्तियाँ कब से हैं और उन्हें भरने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए
  • अनुमानित रूप से कितने समय में ये नियुक्तियाँ पूरी होंगी
READ ALSO  कस्टम्स अथॉरिटी के पास पोर्ट ट्रस्ट को कस्टोडियन घोषित कर चोरी हुए सामान पर सीमा शुल्क वसूलने का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

अगली सुनवाई की तारीख 4 मई 2026 तय की गई है।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles