दिल्ली शराब नीति मामला: अरविंद केजरीवाल को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत, ईडी समन को चुनौती देने वाली याचिका वापस ली

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा भेजे गए समनों को चुनौती देने वाली उनकी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।

मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता की ओर से यह बताने के बाद कि याचिकाकर्ता अब इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते, याचिका को “वापस ली गई” के रूप में खारिज कर दिया। वकील ने कहा कि केजरीवाल को पहले ही उन आपराधिक मामलों में बरी किया जा चुका है, जो ईडी के समनों के पालन न करने को लेकर दर्ज किए गए थे।

“अब बहुत पानी बह चुका है… मैं यह याचिका नहीं दबाऊंगा। संविधान से जुड़े मुद्दे उपयुक्त समय पर उठाए जाएंगे,” वरिष्ठ वकील ने कहा।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस याचिका में उठाए गए सभी कानूनी मुद्दे भविष्य में उठाए जा सकते हैं।

केजरीवाल ने मार्च 2024 में नौवां समन मिलने के बाद हाईकोर्ट का रुख किया था। 20 मार्च को हाईकोर्ट ने ईडी से याचिका की पोषणीयता पर जवाब मांगा था और 21 मार्च को गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग पर भी ईडी से जवाब तलब किया था, हालांकि कोर्ट ने तब कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। उसी शाम केजरीवाल को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया था।

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इससे पहले 22 जनवरी 2024 को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल को ईडी के समन पर पेश न होने को लेकर दर्ज दो आपराधिक मामलों में बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था:

“समन की वैधता को चुनौती देना कानूनन संभव है”
और
“ईडी यह साबित नहीं कर पाई कि केजरीवाल ने जानबूझकर समन की अवहेलना की।”

कोर्ट ने यह भी माना कि उस समय केजरीवाल एक कार्यरत मुख्यमंत्री थे और उन्हें अपने मौलिक अधिकारों का संरक्षण प्राप्त था।

प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कोर्ट को बताया कि एजेंसी ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए अपील दाखिल करेगी।

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इस मामले में केजरीवाल फिलहाल अंतरिम ज़मानत पर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानत देते हुए “पीएमएलए के तहत गिरफ्तारी की आवश्यकता और औचित्य” से जुड़े कानूनी सवालों को बड़ी पीठ को सौंपा है।

उन्हें 26 जून 2024 को सीबीआई ने भी इसी कथित घोटाले में गिरफ्तार किया था, लेकिन 13 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें ज़मानत दे दी थी।

इस याचिका में केजरीवाल ने पीएमएलए की कुछ धाराओं—विशेषकर गिरफ्तारी, पूछताछ और ज़मानत—की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी थी। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या कोई राजनीतिक दल पीएमएलए के दायरे में आता है।

याचिका में आरोप लगाया गया कि इस कानून का दुरुपयोग कर विपक्ष के नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है ताकि आम चुनाव से पहले केंद्र की सत्ताधारी पार्टी को फायदा हो। इसमें कहा गया कि केजरीवाल विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ के सहयोगी हैं और सरकार के मुखर आलोचक भी हैं, इसलिए ईडी को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

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ईडी का आरोप है कि अब रद्द की जा चुकी शराब नीति तैयार करते समय अन्य आरोपियों की केजरीवाल से बातचीत हुई थी, जिससे उन्हें अवैध लाभ और आम आदमी पार्टी को कथित रूप से घूस के रूप में राशि प्राप्त हुई।

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