दिल्ली हाईकोर्ट ने वयस्क डायपर पर जीएसटी से छूट की मांग पर केंद्र सरकार को 6 महीने में निर्णय लेने का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह वयस्क/क्लिनिकल डायपर पर जीएसटी से छूट देने की मांग वाली याचिका पर विचार कर 6 महीने के भीतर निर्णय ले।

न्यायमूर्ति नितिन डब्ल्यू सांबरे और न्यायमूर्ति अजय डिगपॉल की पीठ ने यह आदेश स्वर्णलता जे और टीएस गुरुप्रसाद द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में वयस्क डायपर पर 5% जीएसटी को मनमाना और भेदभावपूर्ण बताया गया था।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने दलील दी कि वयस्क डायपर दिव्यांग, बुजुर्ग और गंभीर रोगों से पीड़ित व्यक्तियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है और यह कोई लग्जरी वस्तु नहीं है।

उन्होंने कहा,

“सैनिटरी पैड और वयस्क डायपर के उपयोग में कोई वास्तविक अंतर नहीं है। यह ऐसी चीज है जो जिनके लिए जरूरी है, उनके लिए जीवन का अभिन्न हिस्सा है। इसके बिना जीवन में गरिमा नहीं रहती। यह एक आवश्यक स्वच्छता उत्पाद है।”

READ ALSO  मुआवजा सजा का विकल्प नहीं; सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के प्रयास मामले में सजा को 'बिताई गई अवधि' तक सीमित करने वाले हाईकोर्ट के आदेश को रद्द किया

याचिकाकर्ताओं ने 3 सितंबर 2025 को अपनी मांग को लेकर संबंधित प्राधिकरणों को एक अभ्यावेदन भेजा था, जो अब तक लंबित है। अदालत ने कहा:

“हम यह उपयुक्त समझते हैं कि प्रतिवादी को यह निर्देशित किया जाए कि वह याचिकाकर्ता द्वारा दिनांक 3 सितंबर 2025 को प्रस्तुत प्रतिनिधित्व, तथा याचिका में उठाए गए मुद्दों पर विचार कर निर्णय ले और अपनी निर्णयावली एक उचित अवधि, जो हमारे विचार में छह महीने होनी चाहिए, के भीतर सूचित करे।”

सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि जीएसटी लगाए जाने का निर्णय एक नीतिगत मामला है, जिसे एकतरफा नहीं लिया जा सकता। यह मामला जीएसटी परिषद द्वारा विचार योग्य है, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों के प्रतिनिधि होते हैं।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि 2018 में सैनिटरी नैपकिन को जीएसटी से छूट दी गई थी, जो उचित था, और उसी तर्क पर वयस्क डायपर को भी छूट मिलनी चाहिए।

READ ALSO  बहाल सरकारी कर्मचारियों के मामलों में काम नहीं तो वेतन नहीं का सिद्धांत लागू नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

“जीएसटी का बोझ सबसे कमजोर वर्गों — दिव्यांगजन, बुजुर्गों और दीर्घकालिक रोगियों — पर पड़ता है, जो इन्हें रोजाना और जीवनभर बड़ी मात्रा में इस्तेमाल करते हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि केवल सैनिटरी नैपकिन को छूट देना और वयस्क डायपर को नहीं, यह अनुच्छेद 14, 19 और 21 तथा दिव्यांग अधिकार अधिनियम का उल्लंघन है।

अब केंद्र सरकार को हाईकोर्ट द्वारा तय की गई 6 महीने की अवधि में निर्णय लेना होगा। यह निर्णय संभवतः जीएसटी परिषद के स्तर पर लिया जाएगा, जो यह तय करेगी कि वयस्क डायपर को आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में रखकर कर से मुक्त किया जाए या नहीं।

READ ALSO  विशेष अधिनियमों के तहत राज्य के खिलाफ अपराधों में सामान्य रूप से जमानत नहीं दी जा सकती: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles