नाबालिग से शरीरिक संबंध स्थापित करने में लड़की की मर्जी का महत्व नही

फास्ट ट्रैक कोर्ट 41 की न्यायमूर्ति तनु भटनागर ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए टिप्पणी करी है कि शारीरिक संबंध बनाने में नाबालिग की मर्जी के कोई महत्व नही है,यह दुष्कर्म है। साथ ही नाबालिग को बहला फुसलाकर भगा ले जाने और दुष्कर्म करने वाले दोषी युवक को 7 वर्ष की कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। 

मामला

कानपुर के चकेरी थाना निवासी 13 वर्षीय नाबालिग को 19 अगस्त 2010 को क्षेत्र का गुड्डू यादव बहला फुसलाकर घर से भगा ले गया था। नाबालिग की माँ ने गुड्डू व अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। एडीजीसी इन्द्रकता शुक्ला व विनोद त्रिपाठी ने बताया कि गुड्डू के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी। पीड़ित एंव उसकी माँ समेत 6 गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज हुए। 

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नाबालिग ने अपने बयान में कहा कि उसने अपनी सहमति से गुड्डू संग शारीरिक संबंध बनाए थे। पीड़िता और उसकी माँ को पक्षद्रोही घोषित किया गया था। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने गुड्डू को दोषी ठहराते हुए सात वर्ष की कैद और 20 हजार रुपयों की जुर्माना की सजा सुनाई ।

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