यदि न्यायाधीश ही गलती करें तो जनता को इंसाफ कहाँ मिलेगा: इलाहाबाद हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बार बार न्यायिक आदेशों के बाद भी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट द्वारा प्रिंटेड प्रोफार्मा पर समन आदेश जारी करने को लेकर कड़ा रुख इख्तियार करते हुए कहा है कि अगर जज ही गलती करेंगे तो जनता को निष्पक्ष न्याय कहाँ से मिल पायेगा। 

हाई कोर्ट ने बुलंदशहर जिले के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम को चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में वह समन आदेश जारी करते वक्त ज्यादा सावधानी बरतें ,कोई भी आदेश बिना कारण दर्शाए न जारी किया जाए। 

बुलंदशहर के राहुल एंव अन्य तीन की तरफ से 482 सीआरपीसी के तहत याचिका को स्वीकारते हुए यह आदेश जस्टिस मंजुरानी चौहान ने दिया। 

याचिकाकर्ताओं के पक्षकार अधिवक्ता महेश शर्मा का कहना था कि अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कक्ष संख्या एक बुलंदशहर ने 7 सितंबर 2020 को याचीगण को प्रिंटेड प्रोफार्मा पर समन जारी किया।

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आदेश जारी करते वक्त मजिस्ट्रेट ने अपने न्यायिक विवेक का उपयोग नही किया। इसलिए यह खारिज किये जाने योग्य है। यह स्थापित कानून है कि कोई भी समन प्रोफार्मा में जारी नही किया जाएगा। समन जारी करते समय ऐसा करने का साफ तौर पर कारण बताया जाएगा। 

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