ईद-उल-अजहा पर पशु बलि नियम: कलकत्ता हाईकोर्ट ने याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा, जानें क्या है पूरा विवाद

कलकत्ता हाईकोर्ट ने आगामी त्योहार ईद-उल-अजहा (बकरीद) के मौके पर पशु बलि को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जारी किए गए कड़े दिशा-निर्देशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

अदालत की खंडपीठ का यह निर्णय दोनों पक्षों के बीच हुई तीखी बहस के बाद आया है। जहां एक ओर याचिकाकर्ता धार्मिक रीति-रिवाजों के लिए नियमों में ढील देने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी वकीलों ने इन प्रतिबंधों को पूरी तरह कानूनी रूप से सही ठहराया है।

मुख्य विवाद: धार्मिक छूट बनाम सरकारी नियम

इस पूरे कानूनी विवाद की जड़ में राज्य सरकार का वह हालिया नोटिफिकेशन है, जिसमें त्योहार के दौरान पशु बलि को लेकर सख्त नियम और शर्तें तय की गई हैं।

याचिकाकर्ता ‘पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950’ (Animal Slaughter Control Act, 1950) की धारा 12 के तहत इस त्योहार के लिए विशेष छूट की मांग कर रहे हैं। यह विशेष धारा धार्मिक उद्देश्यों के लिए कानून के सामान्य प्रतिबंधों में ढील देने का अधिकार देती है।

एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने दलील दी कि यह मूल कानून 1950 का है, जो आज के समय के हिसाब से काफी पुराना हो चुका है। उन्होंने तर्क दिया कि 1950 में पश्चिम बंगाल का कृषि क्षेत्र पूरी तरह से पालतू पशुओं पर निर्भर था, लेकिन आज आधुनिक तकनीक के आने से खेती में मवेशियों पर निर्भरता बेहद कम हो गई है।

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अपनी दलील को मजबूत करने के लिए भट्टाचार्य ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल में मवेशियों की आबादी में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है।

सरकार का पक्ष: नियमों को बताया कानून सम्मत

दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल राज्य सरकार और केंद्र सरकार के वकीलों ने इन याचिकाओं का पुरजोर विरोध किया।

सरकारी वकीलों ने अदालत को बताया कि विवादित नोटिफिकेशन पूरी तरह से कानून के दायरे में रहकर जारी किया गया है और यह 1950 के अधिनियम के प्रावधानों के बिल्कुल अनुकूल है। इसके अलावा, उन्होंने दलील दी कि ये दिशा-निर्देश कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा साल 2018 और 2022 में दिए गए पिछले फैसलों के अनुरूप ही हैं।

सरकार के अनुसार, इन नियमों का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि बलि से पहले मवेशियों की उम्र और उनके स्वास्थ्य की कानूनी रूप से सही तरीके से जांच (Vetting) की जा सके।

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पश्चिम बंगाल सरकार के नए दिशा-निर्देशों में क्या है?

राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन में ईद के दौरान पशु वध को विनियमित करने के लिए कई अहम निर्देश दिए गए हैं:

  • ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ जरूरी: नियमों के तहत किसी भी ऐसे जानवर की बलि पर पूरी तरह रोक है, जिसके लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसकी उम्र और स्वास्थ्य की पुष्टि करने वाला ‘फिट सर्टिफिकेट’ जारी न किया गया हो।
  • सार्वजनिक स्थानों पर पाबंदी: पूरे राज्य में खुले या सार्वजनिक स्थानों पर पशु बलि देने पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा।
  • सख्त कार्रवाई की चेतावनी: राज्य सरकार ने साफ किया है कि यदि कोई भी व्यक्ति इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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हाईकोर्ट द्वारा अपना फैसला सुरक्षित रखने के बाद, अब दोनों ही पक्षों को अदालत के अंतिम निर्णय का इंतजार है। कोर्ट का यह फैसला तय करेगा कि अगले हफ्ते होने वाले त्योहार पर इन नियमों को किस तरह लागू किया जाएगा।

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