सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामला: केरल हाईकोर्ट ने विजिलेंस कोर्ट की टिप्पणी पर लगाई रोक, मुख्य पुजारी को नोटिस जारी

केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला मंदिर से जुड़े कथित स्वर्ण चोरी मामले की जांच में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया। हाईकोर्ट ने मुख्य पुजारी (तंत्री) कंदारारू राजीवरू की भूमिका को लेकर निचली अदालत द्वारा की गई विवादास्पद टिप्पणियों पर रोक लगा दी है।

जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने यह आदेश विशेष जांच दल (SIT) द्वारा दायर उस अपील पर दिया, जिसमें पुजारी को दी गई जमानत रद्द करने और विजिलेंस कोर्ट की टिप्पणियों को हटाने की मांग की गई थी। जांच दल का दावा है कि निचली अदालत की टिप्पणियों से “न्याय का गंभीर हनन” हुआ है।

क्या है पूरा विवाद?

यह मामला सबरीमाला मंदिर के गर्भगृह (श्रीकोविल) के दरवाजों के फ्रेम और द्वारपाल मूर्तियों पर चढ़े सोने के कथित गबन से जुड़ा है। इस मामले में मुख्य पुजारी कंदारारू राजीवरू को द्वारपाल मामले में 16वां और श्रीकोविल मामले में 13वां आरोपी बनाया गया है।

बीते 18 फरवरी को कोल्लम स्थित विजिलेंस कोर्ट ने पुजारी को जमानत देते हुए कहा था कि उनके खिलाफ “साक्ष्य का एक कतरा भी मौजूद नहीं है।” SIT ने अब इसी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। जांच दल का तर्क है कि विशेष न्यायाधीश की ऐसी “अनावश्यक” टिप्पणियां चल रही जांच की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती हैं।

जांच दल के तर्क और आरोप

अभियोजन पक्ष की ओर से महानिदेशक (अभियोजन) टी.ए. शाजी और अतिरिक्त लोक अभियोजक पी. नारायणन ने दलील दी कि मंदिर से पवित्र कलाकृतियों को अवैध रूप से हटाने में तंत्री की भूमिका संदिग्ध है।

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SIT की अपील के प्रमुख बिंदु:

  • दस्तावेजों में विसंगति: विजिलेंस कोर्ट ने कहा था कि SIT की साजिश की थ्योरी इसलिए विफल है क्योंकि राजीवरू ने 20 जुलाई 2019 के महत्वपूर्ण ‘महार’ (इन्वेंट्री दस्तावेज) पर हस्ताक्षर नहीं किए थे।
  • जानबूझकर दूरी बनाना: इसके जवाब में SIT ने दावा किया कि राजीवरू उस दिन सन्निधानम में मौजूद थे, लेकिन उन्होंने “सीधे सुरागों से बचने के लिए” जानबूझकर हस्ताक्षर नहीं किए ताकि कलाकृतियों को मंदिर से बाहर ले जाने की सुविधा बनी रहे।
  • 19 जुलाई का दस्तावेज: जांच दल ने बताया कि तंत्री ने 19 जुलाई 2019 के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें सोने की परत चढ़ी कलाकृतियों को कथित तौर पर “महज तांबे की प्लेट” बताया गया था। इसी गलत जानकारी के आधार पर उन्हें मंदिर परिसर से बाहर ले जाया गया।
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SIT का यह भी आरोप है कि तंत्री द्वारा दी गई राय के आधार पर ही त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) ने इन कलाकृतियों को पोट्टी नामक व्यक्ति को सौंपने का निर्णय लिया था।

हाईकोर्ट का रुख

विजिलेंस कोर्ट की टिप्पणियों पर रोक लगाने के साथ ही केरल हाईकोर्ट ने कंदारारू राजीवरू को औपचारिक नोटिस जारी कर उनकी जमानत रद्द करने की SIT की मांग पर जवाब मांगा है।

SIT का तर्क है कि केवल एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर न करने को आधार मानकर जांच की गहराई को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब तंत्री की भूमिका मंदिर की संपत्तियों के सत्यापन में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

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