एलपीजी सिलेंडर रिसाव मामला: उपभोक्ता आयोग ने इंडियन ऑयल और वितरक पर लगाया 1 लाख रुपये का जुर्माना

पश्चिम बंगाल के उपभोक्ता आयोग ने रसोई गैस सिलेंडर में रिसाव के कारण झुलसी एक महिला को 1 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) और उसके स्थानीय वितरक को सेवा में लापरवाही और कोताही का दोषी ठहराते हुए यह फैसला सुनाया। आदेश के तहत आईओसीएल को 75,000 रुपये और गैस वितरक को 25,000 रुपये का भुगतान दो महीने की समयावधि के भीतर करने का निर्देश दिया गया है।

आयोग के अध्यक्ष गोपाल किशोर सिन्हा तथा सदस्य मीनाक्षी घोष और सुदीप मजूमदार की पीठ ने 9 जुलाई के अपने आदेश में कहा कि विपक्षी पक्षों की ओर से कोई साक्ष्य पेश न किए जाने के कारण लापरवाही साबित होती है। पीठ ने माना कि पीड़ित महिला को हुई शारीरिक एवं मानसिक पीड़ा और इलाज के खर्च को देखते हुए 1 लाख रुपये का मुआवजा पूरी तरह न्यायसंगत है। आयोग द्वारा नोटिस भेजे जाने के बावजूद न तो इंडियन ऑयल और न ही वितरक सुनवाई में उपस्थित हुए, जिसके बाद मामले पर एकतरफा कार्रवाई करते हुए फैसला सुनाया गया।

हादसे और चोट का ब्योरा

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यह दुर्घटना 11 अगस्त 2023 को उस समय हुई जब पीड़ित महिला अपनी रसोई में खाना बना रही थीं। उन्होंने 23 जून 2023 को एलपीजी सिलेंडर बुक कराया था, जिसकी डिलीवरी अगले दिन 24 जून को हुई थी। खाना बनाने के दौरान सिलेंडर से अचानक गैस का रिसाव हुआ और आग लग गई, जिसने महिला के कपड़ों को चपेट में ले लिया।

अस्पताल के दस्तावेजों से पुष्टि हुई कि हादसे में महिला की पीठ, कंधे और दाहिने हाथ पर 15 प्रतिशत झुलसने के गंभीर घाव आए थे। पीड़ित परिवार के अनुसार, प्राथमिक इलाज में लगभग 50,000 रुपये खर्च हुए, जबकि जलने के निशान मिटाने के लिए संभावित प्लास्टिक सर्जरी पर करीब 2 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च होने का अनुमान है।

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जांच में लापरवाही और सोशल मीडिया पर अनदेखी

घटना के तुरंत बाद पीड़ित महिला के बेटे ने वितरक को रिसाव की जानकारी दी और शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद एक मैकेनिक ने मौके पर पहुंचकर सिलेंडर का निरीक्षण तो किया, लेकिन बार-बार अनुरोध के बावजूद कोई निरीक्षण रिपोर्ट नहीं दी। अगले दिन वितरक ने सिलेंडर बदल दिया और डिलीवरी स्लिप पर स्पष्ट रूप से दर्ज किया कि रिसाव के कारण ही बदलाव किया गया है।

पीड़ित परिवार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) के जरिए आईओसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों से भी संपर्क कर मानसिक और शारीरिक कष्ट के लिए राहत की मांग की थी, लेकिन कंपनी की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया।

सुरक्षा जांच में बड़ी चूक और आयोग के निर्देश

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आयोग के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों से यह भी सामने आया कि संबंधित उपकरण की आखिरी अनिवार्य सुरक्षा जांच जुलाई 2015 में हुई थी। इस पर टिप्पणी करते हुए आयोग ने कहा कि एलपीजी एक अत्यंत संवेदनशील और खतरनाक पदार्थ है, जिसकी दुर्घटनाओं से बचाव के लिए नियमित जांच आवश्यक है। आयोग ने स्पष्ट किया कि गैस कंपनियों और वितरकों की यह जिम्मेदारी है कि वे नियमित सुरक्षा निरीक्षण सुनिश्चित करें और रिसाव की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करें। उपकरणों का उचित रखरखाव न करना और उपभोक्ताओं को समय पर सहायता न देना सेवा में गंभीर कमी को दर्शाता है।

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