तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने चुनावी रैली में दिए गए एक कथित भड़काऊ बयान के मामले में पुलिस की दंडात्मक कार्रवाई से उन्हें 31 जुलाई तक अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। हालांकि, राहत देने के साथ ही कोर्ट ने उनके बयान की भाषा पर गंभीर चिंता जताई और उन पर कुछ कड़े प्रतिबंध भी लागू कर दिए।
मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने डायमंड हार्बर के सांसद को निर्देश दिया कि वे जांच में पूरी तरह सहयोग करें और जांच अधिकारी द्वारा जारी किए जाने वाले सभी नोटिसों का पालन करें। इसके अलावा, कोर्ट ने उनके विदेश जाने पर भी पाबंदी लगा दी है; अब वे अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश से बाहर यात्रा नहीं कर सकेंगे। इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को तय की गई है।
राजनीतिक बयानों की मर्यादा और हिंसा पर कोर्ट की चिंता
यह पूरा कानूनी विवाद 27 अप्रैल को आयोजित एक जनसभा से शुरू हुआ था, जो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के प्रचार के दौरान बुलाई गई थी। इस रैली में अभिषेक बनर्जी ने एक प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाते हुए कथित तौर पर बेहद तीखे और विवादित बयान दिए थे। इस भाषण के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर (FIR) को रद्द कराने के लिए टीएमसी सांसद ने हाईकोर्ट का रुख किया था।
सुनवाई के दौरान जस्टिस भट्टाचार्य ने एक रसूखदार राजनीतिक चेहरे द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि क्या देश की एक बड़ी सत्ताधारी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और संसद सदस्य जैसे गरिमामयी पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसे “गैर-जिम्मेदाराना बयान” देना शोभा देता है?
पश्चिम बंगाल की राजनीतिक संवेदनशीलता का जिक्र करते हुए न्यायाधीश ने कहा, “इस राज्य का चुनाव के बाद होने वाली हिंसा (post-poll violence) का एक बहुत ही काला इतिहास रहा है।” उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अगर ऐसे भड़काऊ बयानों के बाद टीएमसी चुनाव जीत जाती, तो उसके क्या परिणाम हो सकते थे, यह सोचने वाली बात है।
राज्य सरकार ने किया याचिका का विरोध
सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार का पक्ष रख रहे अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) राजदीप मजूमदार ने अभिषेक बनर्जी की एफआईआर रद्द करने वाली याचिका का विरोध किया। हालांकि, उन्होंने पीठ को भरोसा दिलाया कि राज्य की पुलिस इस मामले की जांच निष्पक्ष रूप से और पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत ही करेगी।
अभिषेक बनर्जी को करीब दो महीने की अस्थायी राहत जरूर मिल गई है, लेकिन हाईकोर्ट की इस कड़ी टिप्पणी और यात्रा प्रतिबंधों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनावी रैलियों में होने वाली बयानबाजी अब न्यायिक जांच के दायरे से बाहर नहीं है।

