ठाणे डॉक्टर मारपीट मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट से पार्षद रमेश म्हात्रे को सशर्त जमानत, चार्जशीट तक महाराष्ट्र से बाहर रहने का आदेश

बॉम्बे हाईकोर्ट ने ठाणे जिले के एक अस्पताल में डॉक्टरों के साथ मारपीट के आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे और चार अन्य सह-आरोपियों को शुक्रवार को जमानत दे दी। हालांकि, हाईकोर्ट ने जमानत की सख्त शर्त रखते हुए सभी आरोपियों को मामले में चार्जशीट दाखिल होने तक महाराष्ट्र की सीमा से बाहर रहने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने इस पूरे मामले की सुनवाई को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं।

लोकतंत्र और जनप्रतिनिधि पर हाईकोर्ट की टिप्पणी

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अनखड़ की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि कल्याण-डोंबिवली नगर निगम का एक चुना हुआ पार्षद जनता का प्रतिनिधि होता है। अदालत ने कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि अपने ही मतदाताओं के साथ हिंसा करता है, तो यह लोकतंत्र के बुनियादी ढांचे पर हमला है। हालांकि, पीठ ने यह भी माना कि पुलिस जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और आरोपी पहले ही जेल में समय बिता चुके हैं, इसलिए उन्हें जमानत दी जा सकती है।

कोर्ट की शर्तों के अनुसार, आरोपियों को केवल अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के दौरान ही महाराष्ट्र लौटने की अनुमति होगी। इसके अलावा, अदालत ने आरोपियों के गवाहों से संपर्क करने या सबूतों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है।

फास्ट-ट्रैक सुनवाई और कड़े निर्देश

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मामले की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को 10 दिनों के भीतर विशेष सरकारी वकील नियुक्त करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही पुलिस को आदेश दिया गया है कि वह 12 कार्यदिवसों में स्टेट फॉरेंसिक साइंस लैब से रिपोर्ट प्राप्त कर जांच पूरी करे और इसके अगले पांच दिनों के भीतर अदालत में चार्जशीट पेश करे।

चार्जशीट दाखिल होने के एक सप्ताह के भीतर निचली अदालत को आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने होंगे। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मुकदमा शुरू होने के बाद अभियोजन या बचाव पक्ष के वकीलों को मामूली या अनावश्यक कारणों से स्थगन (तारीख) लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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मामले की पृष्ठभूमि और निचली अदालत का फैसला

यह पूरा मामला 6 जुलाई को ठाणे जिले के शास्त्री नगर अस्पताल में हुई एक घटना से जुड़ा है। एक गर्भवती महिला के परिजनों द्वारा इलाज में देरी का आरोप लगाए जाने के बाद रमेश म्हात्रे और उनके साथियों ने अस्पताल के डॉक्टरों के साथ बहस की थी और कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की थी। इस घटना के बाद क्षेत्र में भारी जनआक्रोश देखने को मिला था।

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इससे पहले 15 जुलाई को कल्याण की एक निचली अदालत ने म्हात्रे को जमानत दे दी थी। हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने 18 जुलाई को इस आदेश पर स्वतः संज्ञान लेते हुए रोक लगा दी थी और म्हात्रे को पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को त्रुटिपूर्ण बताते हुए कहा था कि म्हात्रे के आपराधिक रिकॉर्ड को नजरअंदाज किया गया। न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, म्हात्रे पर पहले भी मारपीट के 18 मामले दर्ज थे, हालांकि उनमें से 17 मामलों में वे बरी हो चुके हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद म्हात्रे ने सरेंडर कर दिया था और तब से वे न्यायिक हिरासत में थे।

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