उमेश कोल्हे की हत्या से समाज में भय फैलाना था मकसद; आरोपी युसूफ खान को जमानत से इनकार: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को अमरावती के फार्मासिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या के मामले में आरोपी पशु चिकित्सक युसूफ खान की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि यह हत्या “समाज में भय और आतंक फैलाने” के इरादे से की गई थी।

न्यायमूर्ति ए. एस. गडकरी और न्यायमूर्ति श्याम चंदक की खंडपीठ ने कहा कि आरोपी के खिलाफ prima facie मामला बनता है और अपराध समाज की अंतरात्मा को झकझोरने वाला है।

“प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपियों ने एक आतंकवादी गिरोह बनाया था, जिसका नेतृत्व एक विशेष आरोपी कर रहा था, और इसका उद्देश्य कथित धार्मिक अपमान का बदला लेना और आम जनता में भय पैदा करना था — चाहे उन्होंने प्रवक्ता (नूपुर शर्मा) की टिप्पणी का समर्थन किया हो या नहीं,” अदालत ने कहा।

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जून 2022 में अमरावती के फार्मासिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने भाजपा की तत्कालीन प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया पोस्ट साझा किए थे, जिनकी टिप्पणियों को लेकर देशभर में विवाद हुआ था।

इस मामले में कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभ में महाराष्ट्र पुलिस ने जांच की थी, जिसे बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपा गया। एनआईए ने आरोपियों पर Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA) की धाराएं लगाई हैं।

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46 वर्षीय युसूफ खान ने अपनी जमानत याचिका में कहा कि उसने किसी की हत्या में भाग नहीं लिया, बल्कि केवल अन्य डॉक्टरों से यह कहा था कि वे उमेश कोल्हे की दवा दुकान से दवाएं न खरीदें।

हालांकि अदालत ने इसे पर्याप्त नहीं माना।

“यह अपराध अत्यंत गंभीर और जघन्य प्रकृति का है… ऐसे कृत्य समाज की आत्मा को प्रभावित करते हैं, उसे असुरक्षित बनाते हैं और निरंतर भय में जीने को विवश करते हैं,” कोर्ट ने कहा।

अदालत ने यह कहते हुए जमानत देने से इंकार कर दिया कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया गंभीर साक्ष्य हैं।

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“हम इस prima facie राय पर पहुंचने के बाद, अपीलकर्ता (खान) के पक्ष में जमानत का विवेकाधिकार प्रयोग करने के इच्छुक नहीं हैं,” कोर्ट ने आदेश में कहा।

मामले की जांच जारी है और ट्रायल अभी शुरू नहीं हुआ है।

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