बिहार में CJM से नीचे के सभी न्यायिक अधिकारियों को बॉडीगार्ड देने की मांग, BJSA ने सरकार को लिखा पत्र

बिहार ज्यूडिशियल सर्विसेज एसोसिएशन (BJSA) ने राज्य सरकार से मांग की है कि चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) से नीचे के सभी सेवारत न्यायिक अधिकारियों को कम से कम एक पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) या बॉडीगार्ड उपलब्ध कराया जाए। एसोसिएशन ने न्यायिक कामकाज से जुड़े बढ़ते सुरक्षा जोखिमों का हवाला देते हुए मौजूदा नीति की जल्द समीक्षा की मांग की है।

प्रधान सचिव (गृह) को भेजे पत्र में BJSA के सचिव अजीत कुमार सिंह ने राज्य सरकार के 2 मई 2017 के उस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है, जिसके तहत CJM से नीचे के न्यायिक अधिकारियों को बॉडीगार्ड देने का प्रावधान नहीं है।

एसोसिएशन का कहना है कि बॉडीगार्ड आवंटन की व्यवस्था को अधिक व्यापक बनाया जाना चाहिए और सुरक्षा केवल पद के आधार पर तय नहीं होनी चाहिए।

न्यायिक कार्यों से जुड़े सुरक्षा जोखिम

BJSA ने कहा कि विकेंद्रीकृत व्यवस्था के तहत ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट भी कई मामलों में CJM के समान जिम्मेदारियां निभाते हैं। संज्ञान लेने की शक्तियां अलग-अलग मजिस्ट्रेटों में बांटी गई हैं और पुलिस थानों का आवंटन भी उनके बीच किया गया है।

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एसोसिएशन के मुताबिक जूनियर मजिस्ट्रेट नियमित रूप से आरोपियों, विचाराधीन कैदियों और संवेदनशील आपराधिक मामलों से जुड़े पक्षकारों से निपटते हैं। इनमें संगठित अपराध, माओवादी गतिविधियों और अन्य ऐसे अपराधों से जुड़े मामले भी शामिल हैं जिनमें सुरक्षा का खतरा हो सकता है।

BJSA ने कहा कि एडिशनल CJM और ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास भी CJM की तरह संज्ञान लेने की शक्तियों का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए उनके सामने मौजूद सुरक्षा जोखिम भी कम नहीं हैं।

महिला न्यायिक अधिकारियों का भी उठाया मुद्दा

एसोसिएशन ने बिहार न्यायपालिका में महिला अधिकारियों की बढ़ती संख्या का भी जिक्र किया। इनमें बड़ी संख्या सिविल जज जूनियर डिवीजन और सिविल जज सीनियर डिवीजन के पदों पर कार्यरत है।

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मौजूदा प्रस्ताव के तहत इन अधिकारियों को बॉडीगार्ड की सुविधा नहीं मिलती। BJSA ने कहा कि सरकारी नौकरियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की राज्य सरकार की नीति और अनुमंडलों में अधिक अदालतें खोलने के फैसले को देखते हुए इस व्यवस्था पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।

पत्र में यह भी कहा गया कि बुनियादी ढांचे की कमी के कारण कई न्यायिक अधिकारियों को अब भी जिला मुख्यालय से अनुमंडलीय अदालतों तक आना-जाना पड़ता है। इससे यात्रा के दौरान और उन स्थानों पर जोखिम बढ़ जाता है जहां सुरक्षा व्यवस्था सीमित है।

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BJSA ने राज्य सरकार से 2017 की नीति की समीक्षा कर CJM से नीचे के न्यायिक अधिकारियों को भी उनके काम से जुड़े सुरक्षा जोखिमों के आधार पर व्यक्तिगत सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।

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