भोजशाला–कमाल मौला मस्जिद विवाद: एएसआई सर्वे रिपोर्ट पर आपत्तियाँ दाखिल करने हेतु पक्षकारों को दो सप्ताह का समय, 16 मार्च को अगली सुनवाई

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सोमवार को भोजशाला मंदिर–कमाल मौला मस्जिद परिसर से संबंधित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट पर सभी पक्षकारों को अपनी आपत्तियाँ, सुझाव और अभिमत दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय प्रदान किया। मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को निर्धारित की गई है।

धार जिले स्थित भोजशाला परिसर को हिंदू पक्ष वाग्देवी (मां सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह परिसर एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है।

हाईकोर्ट के निर्देश पर एएसआई ने वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया था और 15 जुलाई 2024 को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, जिसे सीलबंद लिफाफे में दाखिल किया गया था। 22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को यह सीलबंद रिपोर्ट खोलने का निर्देश दिया था।

न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने रिकॉर्ड किया कि रिपोर्ट खोली जा चुकी है और उसकी प्रतियां सभी पक्षों को उपलब्ध करा दी गई हैं। कोर्ट ने पाया कि अब तक किसी भी पक्ष ने रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियाँ या सुझाव दाखिल नहीं किए हैं।

पीठ ने आदेश दिया कि
“पक्षकारों को रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियाँ, अभिमत, सुझाव और अनुशंसाएँ दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया जाता है।”

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पक्षकारों के अनुसार, एएसआई रिपोर्ट के “संक्षिप्त निष्कर्ष” अध्याय में वैज्ञानिक परीक्षण से प्राप्त स्थापत्य अवशेष, मूर्तिशिल्प खंड, साहित्यिक शिलालेखों वाले बड़े पत्थर, स्तंभों पर नागकर्णिका शिलालेख आदि के आधार पर यह संकेत मिलता है कि स्थल पर पूर्व में साहित्यिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़ा एक विशाल ढांचा मौजूद था।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैज्ञानिक जांच और प्राप्त पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर यह पूर्ववर्ती संरचना परमार काल की प्रतीत होती है। साथ ही अध्ययन में यह उल्लेख किया गया है कि वर्तमान संरचना का निर्माण पूर्ववर्ती मंदिरों के अवशेषों का उपयोग कर किया गया था।

याचिकाकर्ता संगठन हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के अधिवक्ता विनय जोशी ने बताया कि एएसआई ने 98 दिन का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर 10 खंडों में 2,000 से अधिक पृष्ठों की रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें सिक्कों, सनातन धर्म से जुड़े प्रतीकों और देवी–देवताओं की मूर्तियों का विवरण शामिल है। उन्होंने कहा कि परिसर की प्रकृति का अंतिम निर्धारण न्यायालय के निर्णय से होगा।

परिसर में शुक्रवार की नमाज अदा करने वाले तीन व्यक्तियों ने हस्तक्षेप आवेदन दाखिल किया है। उनके अधिवक्ता अशहर वारसी ने तर्क दिया कि यह विवाद तथ्यात्मक प्रश्नों से संबंधित है, जिसकी पहले सिविल कोर्ट द्वारा जांच होनी चाहिए, और वर्तमान में हाईकोर्ट में याचिका बनाए रखने योग्य नहीं है।

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पूर्व में विवाद के बाद एएसआई ने 7 अप्रैल 2003 को आदेश जारी कर परिसर में हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार पूजा और मुस्लिमों को प्रत्येक शुक्रवार नमाज अदा करने की अनुमति दी थी।

हाईकोर्ट अब एएसआई रिपोर्ट पर पक्षकारों की आपत्तियाँ प्राप्त होने के बाद 16 मार्च को मामले की अगली सुनवाई करेगा।

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