डोमिनेंस दुरुपयोग जांच पर BFI की याचिका: दिल्ली हाईकोर्ट ने CCI से जवाब मांगा

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को भारतीय बास्केटबॉल महासंघ (Basketball Federation of India – BFI) की उस याचिका पर प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) से जवाब मांगा, जिसमें आयोग द्वारा कथित डोमिनेंस के दुरुपयोग और प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों की जांच के आदेश को चुनौती दी गई है।

न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने BFI की मुख्य याचिका और जांच आदेश पर रोक लगाने की अंतरिम अर्जी पर नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 मार्च की तारीख तय की।

प्रतिस्पर्धा आयोग ने यह कार्यवाही ‘एलीट प्रो बास्केटबॉल प्राइवेट लिमिटेड’ (EPBL) द्वारा दायर शिकायत के आधार पर शुरू की थी। EPBL ने आरोप लगाया था कि महासंघ ने उसे बाज़ार तक पहुँच से वंचित किया और खिलाड़ियों को गैर-मान्यता प्राप्त प्रतियोगिताओं में भाग लेने से रोका।

EPBL ने 11 मार्च 2024 को जानकारी दी थी, जिसे आयोग ने 21 अगस्त 2025 को संज्ञान में लिया। आयोग ने 25 नवम्बर 2025 को अपने आदेश में कहा कि धारा 3 और 4 के प्रथम दृष्टया उल्लंघन का मामला बनता है और जांच महानिदेशक को विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया।

BFI की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वैभव गग्गर ने पेश होकर दलील दी कि महासंघ एक राष्ट्रीय खेल महासंघ है और एक रेगुलेटर की भूमिका में कार्य करता है, न कि एक व्यावसायिक संस्था की तरह। उन्होंने कहा,

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“रेगुलेटर को रेगुलेट नहीं किया जा सकता,” और तर्क दिया कि CCI ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह आदेश पारित किया।

याचिका में कहा गया है कि EPBL ने 2022 में एक प्रोफेशनल लीग का आयोजन करने में रुचि दिखाई थी, लेकिन वह न तो रोडमैप दे पाया और न ही निविदा प्रक्रिया में भाग लिया। इसलिए महासंघ को दूसरे आयोजनकर्ता की तलाश करनी पड़ी।

BFI ने तर्क दिया:

“गैर-मान्यता प्राप्त प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों की भागीदारी को लेकर चेतावनी देना एक नीतिगत और रेगुलेटरी निर्णय है, न कि कोई प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधि।”

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महासंघ ने यह भी कहा कि आयोजनकर्ता को पारदर्शी प्रक्रिया से चुनना और खेल के विकास हेतु वित्तीय संसाधन जुटाना एक नीतिगत निर्णय है, जिसे प्रतिस्पर्धा कानून के तहत व्यावसायिक गतिविधि नहीं माना जा सकता।

BFI ने जांच आदेश के प्रभाव पर रोक की मांग करते हुए कहा कि इसका “वैश्विक असर” पड़ सकता है, क्योंकि यह खेल महासंघों की रेगुलेटरी स्वायत्तता को प्रभावित करेगा।

कोर्ट अब इस याचिका पर 10 मार्च को अगली सुनवाई करेगा।

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