छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह सुनेगा चैतन्य बघेल की जमानत के खिलाफ अपील; सौम्या चौरसिया को हाईकोर्ट जाने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को शराब घोटाले में मिली जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई एक सप्ताह के लिए टाल दी है। साथ ही कोर्ट ने पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया को नए मामलों में ज़मानत के लिए हाईकोर्ट का रुख करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को छत्तीसगढ़ सरकार की उस अपील पर सुनवाई एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दी जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को शराब घोटाले से जुड़े मामलों में मिली ज़मानत को चुनौती दी गई है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति एन वी अंजनिया की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने राज्य सरकार की ओर से पेश होते हुए बताया कि जमानत मिलने के बाद मामले के एक महत्वपूर्ण गवाह ने आगे आने से मना कर दिया है।

इससे अलग, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चैतन्य बघेल को मिली जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से अलग पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया की याचिका पर भी विचार किया, जिन्हें ईडी ने दिसंबर 2025 में कथित शराब घोटाले में गिरफ्तार किया था।

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उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले अन्य मामलों में उन्हें ज़मानत दी थी, लेकिन एजेंसियां बार-बार नई एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर रही हैं। उन्होंने कहा, “यह छठी बार है जब उन्हें गिरफ्तार किया गया है।”

कोर्ट ने चौरसिया की याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए उन्हें निर्देश दिया कि वे एक सप्ताह के भीतर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में ज़मानत याचिका दाखिल करें। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट इस याचिका को प्राथमिकता के आधार पर लेकर दो सप्ताह के भीतर निर्णय ले।

कोर्ट को यह भी बताया गया कि सौम्या चौरसिया को आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 2 जनवरी को एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह उस मामले में भी ज़मानत के लिए हाईकोर्ट जा सकती हैं।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले उन्हें कोयला लेवी घोटाले में ज़मानत दी थी, लेकिन इसके बाद ईडी और EOW ने शराब घोटाले में उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया।

2 जनवरी को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की एकल पीठ (न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा) ने चैतन्य बघेल को दो मामलों—एक ईडी द्वारा दर्ज और दूसरा ACB/EOW द्वारा दर्ज मामले में ज़मानत दे दी थी।

ईडी के मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि चैतन्य की कथित भूमिका उन अन्य वरिष्ठ आरोपियों से कम प्रतीत होती है जिन्हें सुप्रीम कोर्ट पहले ही ज़मानत दे चुका है, जैसे कि अनवर ढेबर, अनिल टूटेजा, अरविंद सिंह, अरुणपति त्रिपाठी और त्रिलोक सिंह ढिल्लों। अदालत ने कहा कि “समानता के सिद्धांत” के तहत चैतन्य को ज़मानत से वंचित करना अनुचित होगा।

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कोर्ट ने यह भी नोट किया कि जांच मुख्य रूप से दस्तावेज़ी है और चैतन्य पहले से ही एक लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रह चुके हैं। कोर्ट ने कहा, “ईडी द्वारा एकत्र किए गए दस्तावेज़, डिजिटल रिकॉर्ड और PMLA की धारा 50 के तहत दिए गए बयानों की प्रमाणिकता का परीक्षण मुकदमे में होगा, न कि ज़मानत चरण में।”

ACB/EOW के मामले में ज़मानत देते हुए हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि सह-आरोपी लक्ष्मी नारायण बंसल के खिलाफ जारी खुले वारंट के बावजूद उन्हें गिरफ्तार न करना “कानून का गंभीर उल्लंघन” है।

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ईडी ने चैतन्य बघेल को 18 जुलाई 2023 को मनी लॉन्ड्रिंग जांच में गिरफ्तार किया था और इसके बाद 24 सितंबर को ACB/EOW ने जेल में रहते हुए ही उन्हें अपने मामले में गिरफ्तार किया।

अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

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