अरुणाचल में सीएम परिवार से जुड़ी कंपनियों को ₹1,270 करोड़ के ठेके: CBI जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश में सार्वजनिक कार्यों के ठेकों को मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़ी कंपनियों को दिए जाने के आरोपों की CBI जांच की मांग वाली याचिका पर मंगलवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने पक्षकारों को दो सप्ताह के भीतर लिखित प्रस्तुतियां दाखिल करने की अनुमति दी।

एनजीओ सेव मोन रीजन फेडरेशन और वॉलंटरी अरुणाचल सेना की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने राज्य सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के परिवार से सीधे जुड़े चार फर्मों को पिछले दस वर्षों में लगभग ₹1,270 करोड़ के कार्य आवंटित किए गए।

उनके अनुसार, इनमें से ₹1,245 करोड़ के कार्य टेंडर के माध्यम से दिए गए, जबकि लगभग ₹25 करोड़ के अतिरिक्त कार्य आदेश भी इन्हीं फर्मों को मिले। उन्होंने कहा कि यह राशि राज्य में इस अवधि के दौरान दिए गए कुल सरकारी ठेकों का लगभग तीन प्रतिशत है।

भूषण ने दलील दी कि ये फर्म मुख्यमंत्री, उनकी पत्नी, माता और भाई से संबंधित हैं और मामले में निष्पक्ष जांच के लिए CBI जांच आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि यह जांच की जानी चाहिए कि टेंडर प्रक्रिया में शामिल अन्य कंपनियों का मुख्यमंत्री से प्रत्यक्ष या परोक्ष संबंध तो नहीं था।

राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने याचिका का विरोध करते हुए इसे “प्रायोजित मुकदमा” बताया।

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इससे पहले, 2 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश सरकार को 2015 से 2025 तक दिए गए सभी ठेकों का विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था, जिसमें मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़ी कंपनियों को दिए गए ठेकों का विवरण भी शामिल हो।

इस जनहित याचिका में मुख्यमंत्री पेमा खांडू को पक्षकार बनाया गया है। उनके पिता की दूसरी पत्नी रिंचिन ड्रेमा और भतीजे त्सेरिंग ताशी को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है।

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याचिका में विशेष रूप से आरोप लगाया गया है कि ड्रेमा की कंपनी ‘ब्रांड ईगल्स’ को बड़ी संख्या में सरकारी ठेके दिए गए, जिससे हितों के टकराव का प्रश्न उठता है।

पेमा खांडू के पिता दोरजी खांडू वर्ष 2007 से 2011 तक अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे थे और अप्रैल 2011 में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनका निधन हो गया था।

फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट लिखित दलीलों और रिकॉर्ड का अवलोकन कर यह तय करेगा कि मामले में केंद्रीय एजेंसी से जांच कराना आवश्यक है या नहीं।

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