इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर के 43 साल पुराने हत्याकांड में छह दोषियों की उम्रकैद बरकरार रखी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर के एक बहुचर्चित हत्याकांड में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को सही ठहराया है। अदालत ने इस मामले में दायर दोषियों की अपील को खारिज कर दिया, जिससे करीब 43 साल पुराना यह मामला अपने अंजाम तक पहुंच गया है।

जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने 8 जून को दिए अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सभी छह दोषी इस समय जेल में बंद हैं और वे निचली अदालत द्वारा दी गई अपनी बची हुई सजा को जेल में ही काटेंगे। हाईकोर्ट ने जिला अदालत के 17 नवंबर 1983 के फैसले को पूरी तरह सही माना है।

वारदात का पूरा मामला

यह पूरा मामला 10 अगस्त 1982 का है, जब पुरानी रंजिश के चलते सहारनपुर के हरिद्वार थाना क्षेत्र में सतीश कुमार पर चाकुओं से जानलेवा हमला कर उनकी हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिसके बाद सहारनपुर की जिला अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए सभी आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

सजा के बाद जमानत और फिर गिरफ्तारी

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निचली अदालत से 17 नवंबर 1983 को सजा मिलने के बाद दोषियों ने इसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट ने उस समय उनकी अपील स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया था। हालांकि, अपील पर सुनवाई के दौरान आरोपियों या उनके वकीलों के लगातार गैर-हाजिर रहने पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने इनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए, जिसके बाद पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर वापस जेल भेज दिया। ये सभी दोषी फिलहाल जेल में ही बंद हैं।

हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

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सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष के सबूतों से यह पूरी तरह साबित होता है कि वारदात वाले दिन सभी आरोपियों ने एक साझा मकसद के तहत सतीश कुमार को घेरा और उन पर घातक हथियारों से हमला किया। कोर्ट ने पाया कि दोषियों की अपीलों में कोई ठोस आधार नहीं है और इन्हें खारिज किया जाना चाहिए।

इस मामले में कुल सात आरोपियों ने अपील दायर की थी, लेकिन सुनवाई के लंबे दौर के दौरान एक आरोपी राकेश की मौत हो गई, जिसके बाद उसके खिलाफ मामला समाप्त कर दिया गया। अब हाईकोर्ट का यह फैसला बाकी बचे छह दोषियों— सतीश, शिव कुमार, अशोक, भूपत, विजय और विक्रम पर लागू होगा।

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