इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी कार्यवाही-  10 लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में अनुभाग अधिकारी को बर्खास्त किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निष्पक्ष और पारदर्शी न्यायपालिका की दिशा में साहसिक और स्वागत योग्य कदम उठाते हुए 10 लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में एक अनुभाग अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है।

मंगलवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है:

“इलाहाबाद उच्च न्यायालय की अनुभाग अधिकारी (एम्प संख्या 5967) श्रीमती कुसुम मिश्रा को सेवा से बर्खास्तगी की कड़ी सजा के साथ दंडित किया गया है, जो उन्हें उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश के 26 सितंबर, 2022 के आदेश के तहत भविष्य के रोजगार से अयोग्य घोषित करता है। इलाहाबाद के न्यायिक विभाग में श्री महेंद्र प्रताप निवासी पहाड़ी-राजापुर रोड, बनवारीपुर मोड़, कर्वी, थाना कोरवाली करवी, जिला चित्रकूट द्वारा अपने बेटे को अधीनस्थ न्यायालय में रोजगार प्रदान करने के एवज में  10,00,000/- रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में की गई शिकायत पर ये कार्यवाही की गयी है। 

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उक्त कुसुम मिश्रा, अनुभाग अधिकारी के खिलाफ पूरी जांच के बाद, उपरोक्त राशि को स्वीकार करने के भ्रष्टाचार के आरोप साबित हुए और उन्हें सेवा से बर्खास्त करने के लिए दंडित किया गया जो उन्हें भविष्य के रोजगार से अयोग्य घोषित करता है।”

इससे पहले भी मई 2021 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भ्रष्टाचार के आरोप में तीन अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों को बर्खास्त कर दिया था।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल ने विभिन्न अवसरों पर कहा है कि न्यायपालिका में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार के प्रति पूर्ण असहिष्णु नीति होगी।

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