रेणुकास्वामी हत्याकांड: सह-आरोपी के सरकारी गवाह बनने पर आपत्ति नहीं जता सकते दर्शन, कर्नाटक हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज

कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को प्रसिद्ध अभिनेता दर्शन की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने रेणुकास्वामी हत्या मामले में एक सह-आरोपी के सरकारी गवाह बनने की प्रक्रिया पर विरोध दर्ज कराने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), 1973 की धारा 306 के तहत जब कोई आरोपी कोर्ट से माफी मांगकर सरकारी गवाह बनने का आवेदन करता है, तो किसी अन्य सह-आरोपी के पास उस पर आपत्ति जताने या अपनी बात रखने का कोई कानूनी अधिकार नहीं होता।

निचली अदालत के फैसले को चुनौती

मामले में दूसरे नंबर के आरोपी दर्शन फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। उन्होंने बेंगलुरु की 58वीं एडिशनल सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट द्वारा 10 अगस्त को दिए गए फैसले को रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की थी। सेशंस कोर्ट ने दर्शन को मामले के 14वें आरोपी प्रदोष राव की उस अर्जी का विरोध करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, जिसमें प्रदोष ने गवाही के बदले माफी पाने और सरकारी गवाह बनने का अनुरोध किया था।

जस्टिस एम नागप्रसन्ना की पीठ ने इस आपराधिक याचिका पर सुनवाई की। अदालत में दर्शन की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता हसमत पाशा ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक पी प्रसन्ना कुमार पेश हुए।

सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का संदर्भ

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सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि धारा 306 के तहत सह-आरोपी के सीमित अधिकारों को लेकर हाईकोर्ट पहले भी फैसला सुना चुका है। अभियोजक ने कोर्ट को अवगत कराया कि विधायक विनय कुलकर्णी से जुड़े योगेशगौड़ा हत्या मामले में आए ऐसे ही एक आदेश के खिलाफ दायर चुनौती याचिका को सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस नागप्रसन्ना ने माना कि योगेशगौड़ा हत्याकांड में तय हुआ कानूनी ढांचा और सिद्धांत दर्शन की इस याचिका पर भी पूरी तरह लागू होता है। इसके बाद अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।

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मामले की पृष्ठभूमि

रेणुकास्वामी की हत्या के इस मामले में अभिनेता दर्शन और उनकी मित्र अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा सहित कुल 17 लोगों को आरोपी बनाया गया है। अदालती कार्यवाही जारी रहने के दौरान अभिनेता फिलहाल जेल में ही रहेंगे।

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