इलाहाबाद हाईकोर्ट ने SSC GD कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर नकल कराने के आरोपी अमित राणा की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी के काम करने के तरीके से प्रथम दृष्टया संकेत मिलता है कि वह परीक्षा में नकल कराने वाले एक बड़े नेटवर्क का सरगना है।
जस्टिस कृष्ण पहल ने 30 अक्टूबर 2026 को दिए फैसले में कहा कि आरोपी से बरामद 50 लाख रुपये के संबंध में पेश की गई उधारी की रसीदें भी वास्तविक प्रतीत नहीं होतीं।
कोर्ट ने माना कि उपलब्ध सामग्री से आरोपी की इस नेटवर्क में प्रमुख भूमिका होने के संकेत मिलते हैं।
50 लाख रुपये और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बरामदगी
मामला 22 मई 2026 को आयोजित SSC GD कांस्टेबल परीक्षा में कथित सामूहिक नकल से जुड़ा है।
पुलिस ने अमित राणा को सात अन्य आरोपियों के साथ 22 मई 2026 को गिरफ्तार किया था। गौतमबुद्ध नगर जिले के नॉलेज पार्क थाने में एक उपनिरीक्षक की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया।
एफआईआर के अनुसार, पुलिस ने पांच लैपटॉप, एक फोन राउटर, 11 मोबाइल फोन, दो एडमिट कार्ड, चार प्रवेश या पहचान पत्र और 50 लाख रुपये बरामद किए थे।
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 338, 336(3), 340(2), 318(2) और 61(2), उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की धाराओं 13(4) और 13(5) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं 65 और 66 के तहत आरोप लगाए गए हैं।
बचाव पक्ष ने कहा, किसी अभ्यर्थी ने पैसे देने का आरोप नहीं लगाया
अमित राणा की ओर से अधिवक्ता विनीत पांडेय ने मोहनीश चंद्रा और प्रणवेश के साथ दलील दी कि उनके मुवक्किल को गलत तरीके से फंसाया गया है।
बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। किसी भी अभ्यर्थी ने यह आरोप नहीं लगाया कि उसने अमित राणा को पैसे दिए या परीक्षा में उससे मदद ली।
यह भी कहा गया कि आरोपी के पास से कोई मार्कशीट बरामद नहीं हुई और उसे परीक्षा केंद्र से लगभग 40 किलोमीटर दूर गिरफ्तार किया गया था।
50 लाख रुपये की बरामदगी के संबंध में बचाव पक्ष ने दावा किया कि यह रकम आरोपी की अपनी थी, जिसे उसने रिश्तेदारों और परिचितों से उधार लिया था। इसके समर्थन में कुल 48 लाख रुपये की तीन रसीदें पेश की गईं।
अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपी का नाम केवल सह-आरोपी के बयान में सामने आया है, जिसका कोई साक्ष्यात्मक महत्व नहीं है।
बचाव पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि परीक्षा केंद्र की मान्यता हासिल करने की कोशिश कर रही कंप्यूटर लैब के बीच प्रतिद्वंद्विता के कारण अमित राणा को बलि का बकरा बनाया गया।
आरोपी 23 मई 2026 से जेल में है।
व्हाट्सऐप चैट और प्रॉक्सी सर्वर से नकल कराने का आरोप
राज्य सरकार की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता अरविंद कुमार ने जमानत का विरोध करते हुए अमित राणा को बड़े नकल नेटवर्क का सरगना बताया।
अभियोजन पक्ष ने विदेशी वर्चुअल नंबरों से की गई कथित व्हाट्सऐप बातचीत का हवाला दिया। आरोप है कि अमित राणा और सह-आरोपी प्रदीप चौहान ने परीक्षा की सुबह प्रॉक्सी सर्वर, AnyDesk, एडमिट कार्ड और अभ्यर्थियों के सीट नंबरों के संबंध में बातचीत की थी।
राज्य सरकार ने बताया कि SSC से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार प्रॉक्सी सर्वर के माध्यम से 30 लॉग से छेड़छाड़ की गई थी।
अभियोजन ने यह भी आरोप लगाया कि अमित राणा ने 22 जनवरी से 15 फरवरी 2026 के बीच दिल्ली पुलिस परीक्षा से संबंधित 179 लिंक एक सहयोगी को भेजे थे।
इसके अलावा 6 मई से 22 मई 2026 के बीच SSC GD परीक्षा से जुड़े 13 लिंक सह-आरोपी प्रदीप चौहान को भेजने का भी आरोप लगाया गया।
उधारी की रसीदों में तारीखों का अंतर, हाईकोर्ट ने उठाए सवाल
हाईकोर्ट ने बचाव पक्ष द्वारा पेश की गई तीनों रसीदों की जांच की।
कोर्ट ने पाया कि आरोपी के भाई से 21 लाख रुपये उधार लेने संबंधी तीसरी रसीद पर स्टांप खरीदने की तारीख 21 अप्रैल 2026 दर्ज थी, जबकि पब्लिक नोटरी की तारीख 24 मार्च 2026 थी।
इस विसंगति पर कोर्ट ने कहा:
“यह समयक्रम के विपरीत है और जालसाजी का संकेत देता है।”
हाईकोर्ट ने आरोपी की कथित भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा:
“आवेदक के काम करने का तरीका प्रथम दृष्टया संकेत देता है कि वह नकल कराने वाले एक बड़े नेटवर्क का सरगना है, जिससे वास्तविक अभ्यर्थियों का करियर बर्बाद हो रहा है।”
बेंच ने आगे कहा:
“इससे समग्र रूप से परीक्षा निगरानी व्यवस्था पर भी कलंक लगता है।”
कोर्ट के अनुसार, उपलब्ध सामग्री से आरोपी इस नेटवर्क के मुख्य योजनाकारों में से एक प्रतीत होता है।
हाईकोर्ट ने कहा:
“कोर्ट के समक्ष पेश की गई रसीदें वास्तविक प्रतीत नहीं होतीं और आवेदक से 50 लाख रुपये की बरामदगी भी उसकी संलिप्तता का संकेत देती है।”
जमानत याचिका खारिज, ट्रायल जल्द पूरा करने का निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत याचिका में कोई आधार नहीं पाते हुए उसे खारिज कर दिया।
कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि यदि कोई कानूनी बाधा नहीं है, तो मामले का जल्द से जल्द निस्तारण किया जाए।
साथ ही हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके द्वारा की गई टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निर्णय तक सीमित हैं। इनका मुकदमे के गुण-दोष के आधार पर होने वाले फैसले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
केस डिटेल्स
केस टाइटल: Amit Rana v. State of U.P.
केस नंबर: Criminal Misc. Bail Application No. 28821 of 2026 एवं Criminal Misc. Bail Application No. 28016 of 2026
पीठ: जस्टिस कृष्ण पहल
फैसले की तारीख: 30 अक्टूबर 2026
