चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने दुबई में बाढ़ के कारण उड़ान प्रभावित होने के मामले में एक एयरलाइन और ऑनलाइन ट्रैवल बुकिंग प्लेटफॉर्म को यात्री को ₹1.88 लाख देने का आदेश बरकरार रखा है। आयोग ने कहा कि खराब मौसम के कारण उड़ान संचालन प्रभावित होना समझा जा सकता है, लेकिन इससे एयरलाइन की यात्रियों को समय पर सूचना देने और वैकल्पिक यात्रा की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती।
आयोग के अध्यक्ष जस्टिस राज शेखर अत्री और सदस्य प्रीतिंदर सिंह की पीठ ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-I, चंडीगढ़ के 4 मई के आदेश के खिलाफ एयरलाइन की अपील खारिज कर दी।
28 अक्टूबर को दिए फैसले में राज्य आयोग ने कहा कि जिला आयोग के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि या महत्वपूर्ण अनियमितता नहीं है।
दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने पर मिली उड़ान प्रभावित होने की जानकारी
मामला चंडीगढ़ के एक व्यक्ति और उनकी पत्नी की यूरोप यात्रा से जुड़ा है। दंपति ने 19 अप्रैल 2024 को नई दिल्ली से दुबई होते हुए मिलान जाने के लिए टिकट बुक किए थे। उनकी वापसी 10 मई 2024 को ग्रीस के थिरा से दुबई होते हुए नई दिल्ली के लिए निर्धारित थी।
दोनों ने ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से टिकटों के लिए ₹1,45,384.99 का भुगतान किया था।
शिकायत के अनुसार, 19 अप्रैल को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने पर दंपति को पता चला कि दुबई में बाढ़ और खराब मौसम के कारण उनकी उड़ान प्रभावित हुई है। उन्हें विमान में सवार होने की अनुमति नहीं मिली।
यात्री का आरोप था कि एयरलाइन और बुकिंग प्लेटफॉर्म ने एयरपोर्ट पहुंचने से पहले उड़ान में व्यवधान की पर्याप्त जानकारी नहीं दी थी।
वैकल्पिक उड़ान उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण दंपति को दूसरी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन से ₹2.13 लाख में नए टिकट खरीदने पड़े।
शिकायतकर्ता ने पहले से बुक आवास और एक दिन के कारोबारी अवसरों के नुकसान के लिए ₹23,600 का दावा भी किया।
इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार संपर्क करने के बावजूद बुकिंग प्लेटफॉर्म ने उनकी वापसी के टिकट दोबारा जारी नहीं किए। कंपनियों ने शुरुआत में ₹54,938.50 वापस करने की बात कही, लेकिन बाद में यह राशि घटाकर ₹24,582 कर दी।
एयरलाइन ने दुबई में बाढ़ और तूफान का दिया हवाला
जिला आयोग के आदेश को चुनौती देते हुए एयरलाइन ने तर्क दिया कि उड़ान संचालन में व्यवधान उसके नियंत्रण से बाहर की असाधारण परिस्थितियों के कारण हुआ था।
एयरलाइन के अनुसार, 14 से 19 अप्रैल 2024 के बीच दुबई में अभूतपूर्व बाढ़ और तूफान के कारण विमान सेवाएं प्रभावित हुई थीं और हजारों यात्री फंस गए थे।
कंपनी ने दावा किया कि ट्रांजिट यात्रियों पर लगाए गए प्रतिबंधों की जानकारी अपनी वेबसाइट, सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से सार्वजनिक की गई थी।
एयरलाइन ने यह भी कहा कि ऐसी आपात स्थिति में प्रत्येक प्रभावित यात्री को व्यक्तिगत रूप से सूचना देना संभव नहीं था।
समय पर सूचना देने का सबूत पेश नहीं कर सकी एयरलाइन
राज्य आयोग ने एयरलाइन की दलीलों पर विचार करते हुए कहा कि असाधारण मौसम संबंधी परिस्थितियां उड़ान संचालन में बाधा का कारण हो सकती हैं, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि प्रभावित यात्रियों को उचित समय पर सूचना दी गई या वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई गई।
आयोग ने पाया कि दंपति को उड़ान प्रभावित होने की जानकारी 19 अप्रैल को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने के बाद ही मिली थी।
एयरलाइन यह साबित नहीं कर सकी कि उसने इससे पहले यात्रियों को सूचना दी थी या उनके लिए किसी दूसरी उड़ान की व्यवस्था की थी।
सुनवाई के दौरान आयोग ने 19 अप्रैल को अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास की ओर से जारी एडवाइजरी और एयरलाइन द्वारा प्रस्तुत ईमेल पर भी विचार किया।
आयोग ने कहा कि एयरलाइन ने स्वयं स्वीकार किया था कि दुबई में बाढ़ और तूफान का सिलसिला 14 से 19 अप्रैल के बीच शुरू हुआ था। यदि यात्रियों को 14 या 15 अप्रैल को ही जानकारी दे दी जाती, तो वे वैकल्पिक यात्रा की व्यवस्था कर सकते थे और संभवतः अतिरिक्त खर्च से बच सकते थे।
आयोग ने स्पष्ट किया कि एयरलाइन को केवल खराब मौसम के कारण उड़ान प्रभावित होने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। उसकी कमी यह साबित नहीं कर पाने में थी कि यात्रियों को समय पर सूचना दी गई और उचित वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई गई।
₹1.88 लाख के साथ 9 प्रतिशत ब्याज देने का आदेश
राज्य आयोग ने जिला आयोग के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए एयरलाइन और ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म को ₹1.88 लाख देने का निर्देश बरकरार रखा।
इस राशि पर उपभोक्ता शिकायत दाखिल करने की तारीख से भुगतान होने तक 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।
इसके अतिरिक्त, दोनों कंपनियों को मानसिक परेशानी, उत्पीड़न और मुकदमे के खर्च के लिए ₹10,000 का भुगतान करना होगा।
आयोग के फैसले से स्पष्ट है कि खराब मौसम जैसी असाधारण परिस्थितियों में उड़ानें प्रभावित होने और यात्रियों को समय पर सूचना देने में विफल रहने की जिम्मेदारियां अलग-अलग हैं।
