दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) को पहलवान विनेश फोगाट के खिलाफ जारी दो कारण बताओ नोटिस पर दो सप्ताह के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि इस अवधि के बाद कोई फैसला लिया जाता है, तो वह अगली सुनवाई तक प्रभावी नहीं होगा।
जस्टिस अमित महाजन ने 29 अक्टूबर को पारित आदेश में विनेश फोगाट की उस चिंता को उचित माना, जिसमें उन्होंने लंबित अनुशासनात्मक कार्रवाई के कारण आगामी कुश्ती प्रतियोगिताओं में भागीदारी प्रभावित होने की आशंका जताई थी।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी 2027 को निर्धारित की है।
प्रतियोगिता से पहले अनिश्चितता पर हाईकोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान विनेश फोगाट के वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि WFI ने 9 मई और 17 जून को जारी दोनों कारण बताओ नोटिस पर अब तक कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल विनेश के आगामी प्रतियोगिताओं में भाग लेने पर कोई रोक नहीं है। हालांकि, किसी प्रतियोगिता के शुरू होने से ठीक पहले प्रतिकूल फैसला आने की स्थिति में उनके पास प्रभावी कानूनी उपाय अपनाने का पर्याप्त अवसर नहीं रह सकता।
अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि विनेश दिसंबर के मध्य में प्रस्तावित राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में हिस्सा लेना चाहती हैं, लेकिन लंबित नोटिस उनके लिए लगातार अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं।
जस्टिस महाजन ने इस चिंता को वास्तविक मानते हुए कहा कि किसी भी प्रतिस्पर्धात्मक खेल में भाग लेने के लिए खिलाड़ी का मानसिक रूप से सहज और तनावमुक्त रहना जरूरी है, ताकि उसके प्रदर्शन पर प्रतिकूल असर न पड़े।
अदालत ने टिप्पणी की,
“किसी खिलाड़ी को इस प्रकार की प्रतिस्पर्धात्मक प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए शारीरिक रूप से फिट और मानसिक रूप से सहज स्थिति में होना चाहिए, ताकि उसका प्रदर्शन किसी भी तरह प्रभावित न हो।”
इसके बाद हाईकोर्ट ने WFI को दोनों नोटिस पर दो सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अवधि के बाद लिया गया कोई भी निर्णय अगली सुनवाई तक प्रभावी नहीं होगा।
WFI की अनुशासनात्मक कार्रवाई को दी चुनौती
विनेश फोगाट ने अपनी याचिका में WFI द्वारा अनुशासनहीनता और एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन के आरोप में जारी दोनों कारण बताओ नोटिस को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने अपने खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही को भी चुनौती दी है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि महासंघ की कार्रवाई मनमानी और दुर्भावनापूर्ण रवैये का हिस्सा है, जिससे मातृत्व के बाद प्रतिस्पर्धात्मक कुश्ती में उनकी वापसी बाधित हो रही है।
विनेश के अनुसार, इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने उन्हें 1 जनवरी 2026 से प्रतियोगिताओं में भाग लेने की अनुमति दे दी थी। इसके बावजूद WFI ने पात्रता संबंधी ऐसा ढांचा अपनाया, जिससे वह प्रभावी रूप से चयन प्रक्रिया से बाहर हो गईं।
याचिका में कहा गया है कि इसके तुरंत बाद महासंघ ने एंटी-डोपिंग और व्हेयरअबाउट्स संबंधी नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर पहला कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।
विनेश ने दलील दी कि लंबित नोटिस और अनुशासनात्मक कार्यवाही राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में उनकी वापसी में बाधा बन रही हैं। इससे आगामी प्रतियोगिताओं के लिए उनकी पात्रता, नामांकन और भागीदारी प्रभावित होने की आशंका है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने विनेश की याचिका पर भारतीय कुश्ती महासंघ और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
मामले में अगली सुनवाई 20 जनवरी 2027 को होगी।
