पटना हाईकोर्ट ने रोहतास के पूर्व पुलिस अधीक्षक (SP) के खिलाफ ट्रायल कोर्ट द्वारा शुरू की गई अवमानना की कार्यवाही में आगे कोई कदम उठाने पर रोक लगा दी है। मामला अदालत के उस आदेश का पालन नहीं करने से जुड़ा है, जिसमें झूठी गवाही देने के आरोप में एक व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज और आदेश भी तलब किए हैं।
जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सुनील दत्ता मिश्रा की डिवीजन बेंच ने इस बात पर सवाल उठाया कि जब ट्रायल कोर्ट के वर्ष 2023 के फैसले और उससे जुड़े निर्देशों के खिलाफ अपील हाईकोर्ट में लंबित थी, तब निचली अदालत ने मामले में आगे कार्यवाही क्यों जारी रखी।
गुरुवार को जारी आदेश में बेंच ने कहा कि यह एक असामान्य स्थिति है, जो संभवतः पहले कभी सामने नहीं आई। हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत को न्यायिक प्रक्रिया की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए था। हालांकि, बेंच ने फिलहाल इस मुद्दे पर कोई और टिप्पणी करने से परहेज किया।
रोहतास के प्रधान जिला जज से मांगी रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने रोहतास के प्रधान जिला जज को निर्देश दिया कि वह पूर्व पुलिस अधीक्षक के खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही से जुड़े सभी दस्तावेजों और आदेशों के साथ अपनी रिपोर्ट पेश करें।
मामला तब शुरू हुआ था, जब ट्रायल कोर्ट ने तत्कालीन रोहतास पुलिस अधीक्षक को एक व्यक्ति के खिलाफ कथित रूप से झूठी गवाही देने के आरोप में FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था।
आदेश का पालन नहीं होने पर ट्रायल कोर्ट ने पूर्व पुलिस अधीक्षक के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू कर दी और जुर्माना भी लगाया।
एडवोकेट जनरल ने ट्रायल कोर्ट के आदेश पर उठाए सवाल
राज्य की ओर से पेश एडवोकेट जनरल एसडी संजय ने ट्रायल कोर्ट के आदेश की कानूनी वैधता पर सवाल उठाए।
उन्होंने दलील दी कि कानून के तहत किसी अदालत को झूठी गवाही देने के मामले में सीधे FIR दर्ज करने का निर्देश देने का अधिकार नहीं है। ऐसे मामलों में अदालत को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार खुद लिखित शिकायत दाखिल करनी होती है।
एडवोकेट जनरल ने बेंच को बताया कि ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दिए जाने के बावजूद निचली अदालत लगातार आदेश पारित करती रही।
उन्होंने लंबित अपील पर जल्द सुनवाई करने का भी अनुरोध किया।
25 नवंबर को होगी सुनवाई, तब तक आगे की कार्रवाई पर रोक
एडवोकेट जनरल के अनुरोध पर पटना हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अपील को 25 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध पहले पांच मामलों में शामिल किया जाए।
बेंच ने स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट के निर्देशों की वैधता और उनसे जुड़े अन्य सवालों पर अंतिम सुनवाई के दौरान विचार किया जाएगा।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि तब तक मामले में कोई और कार्रवाई नहीं की जाएगी और न ही ऐसी कोई कदम उठाया जाएगा जिससे विवाद आगे बढ़े।

