दिल्ली जिमखाना क्लब बेदखली मामले की सुनवाई से जस्टिस प्रतीक जालान अलग, मामला दूसरी बेंच के सामने जाएगा

दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस प्रतीक जालान ने बुधवार को दिल्ली जिमखाना क्लब को सफदरजंग रोड स्थित 27.3 एकड़ परिसर से बेदखल करने की केंद्र की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।

जस्टिस जालान ने दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से दाखिल मुकदमे को शुक्रवार को किसी अन्य बेंच के सामने सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

सुनवाई से अलग होते हुए जस्टिस जालान ने संकेत दिया कि मामले से कुछ व्यक्तिगत पहलू जुड़े हैं और वह इसे किसी अन्य जज द्वारा सुना जाना अधिक उचित समझते हैं।

लीज खत्म करने और बेदखली की कार्रवाई को चुनौती

विवाद भूमि एवं विकास कार्यालय यानी L&DO के 22 मई के आदेश से जुड़ा है। इस आदेश के जरिए औपनिवेशिक काल के दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थायी लीज समाप्त कर दी गई थी और उसे 5 जून तक जमीन वापस करने को कहा गया था।

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केंद्र ने इस कार्रवाई के पीछे रक्षा ढांचे को मजबूत और सुरक्षित करने का कारण बताया था।

जिमखाना क्लब के सदस्य विजय खुराना और दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन ने इस कार्रवाई के खिलाफ अलग-अलग मुकदमे दाखिल किए हैं। खुराना की याचिका को 500 से अधिक क्लब सदस्यों का समर्थन बताया गया है।

याचिकाकर्ताओं ने L&DO के एक एस्टेट अधिकारी द्वारा 29 जून को जारी बेदखली संबंधी कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाने की भी मांग की है।

केंद्र ने इससे पहले हाईकोर्ट को बताया था कि फिलहाल बेदखली के संबंध में कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।

केंद्र ने मुकदमों को खारिज करने की मांग की

मुख्य मामले में दाखिल अपने जवाब में केंद्र ने कहा है कि दोनों मुकदमे खारिज किए जाने योग्य हैं।

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केंद्र का कहना है कि जमीन को लेकर अधिकारियों और क्लब के बीच लीज समाप्त हो जाने के बाद तीसरे पक्ष उससे उत्पन्न अधिकारों के अमल में बाधा नहीं डाल सकते।

स्टाफ एसोसिएशन ने रोजगार की सुरक्षा का मुद्दा उठाया

स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन ने अपनी याचिका में कहा है कि उसके सदस्यों में रसोइये, वेटर, रसोई और हाउसकीपिंग कर्मचारी, माली, ग्राउंड्समैन, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, लाइफगार्ड और सुरक्षा कर्मचारी शामिल हैं।

एसोसिएशन ने उनके रोजगार के साधन की सुरक्षा के साथ-साथ संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा की मांग की है।

22 मई के नोटिस को रद्द करने की मांग करते हुए कर्मचारियों ने कहा है कि दिल्ली जिमखाना क्लब उनके लिए केवल मनोरंजन की जगह नहीं बल्कि उनका कार्यस्थल है।

विजय खुराना ने केंद्र के आधारों पर उठाए सवाल

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विजय खुराना ने अपनी याचिका में रक्षा ढांचे और सुरक्षा से जुड़े केंद्र के कारणों को अस्पष्ट और सामान्य बताया है।

उन्होंने आरोप लगाया है कि कानून की उचित प्रक्रिया अपनाए बिना क्लब को जबरन बेदखल करने की कोशिश की जा रही है।

अपनी अंतरिम अर्जी में खुराना ने 29 जून के कारण बताओ नोटिस को भी चुनौती दी है। उनका कहना है कि यह नोटिस गलत और समय से पहले की गई धारणाओं पर आधारित है, जबकि मुख्य मुकदमा अभी लंबित है।

अर्जी में कहा गया है कि बेदखली का नोटिस समय से पहले जारी किया गया क्योंकि उसमें यह मान लिया गया है कि जिमखाना क्लब की स्थायी लीज वैध रूप से समाप्त कर दी गई है।

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