दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल वैध वीजा होने से किसी विदेशी नागरिक को भारत में प्रवेश का पूर्ण और बिना शर्त अधिकार नहीं मिल जाता। खासकर जब इमिग्रेशन अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी जानकारी के आधार पर प्रवेश रोकते हैं, तो इसे केवल वीजा के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती।
जस्टिस अमित महाजन ने एक महिला की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने यह जानने के लिए लिखित कारण मांगे थे कि वैध बिजनेस वीजा होने के बावजूद उसे भारत में प्रवेश क्यों नहीं दिया गया।
कोर्ट ने कहा कि कानून की व्यवस्था वीजा को भारत में प्रवेश की बिना शर्त गारंटी नहीं मानती।
दिल्ली एयरपोर्ट से वापस भेजी गई महिला
याचिकाकर्ता 25 मार्च 2026 को अपने पति के साथ दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंची थी। दोनों के पास एक ही श्रेणी का वीजा था।
उसके पति को भारत में प्रवेश की अनुमति दे दी गई, लेकिन महिला को इमिग्रेशन अधिकारियों ने रोक लिया और उसी दिन तुर्कमेनिस्तान वापस भेज दिया।
महिला ने हाईकोर्ट में कहा कि अधिकारियों ने न तो उसे प्रवेश से इनकार करने का कारण बताया और न ही यह स्पष्ट किया कि उसके पति को अनुमति देने के बावजूद उसके साथ अलग व्यवहार क्यों किया गया। उसने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन बताया।
अधिकारियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इनपुट का हवाला दिया
अधिकारियों ने हाईकोर्ट को बताया कि वैध वीजा किसी विदेशी नागरिक को भारत में प्रवेश का पूर्ण अधिकार नहीं देता।
उनका कहना था कि महिला के खिलाफ प्रतिकूल जानकारी मिली थी। इसी आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए उसे भारत में प्रवेश नहीं देने का फैसला लिया गया।
कोर्ट को बताया गया कि महिला ने वर्ष 2025 में 47 बार भारत की यात्रा की थी। इनमें से ज्यादातर यात्राएं एक से तीन दिन की थीं। वह बिजनेस और मेडिकल, दोनों तरह के वीजा पर भारत आई थी।
इमिग्रेशन अधिकारियों ने उससे यात्रा के उद्देश्य, उसकी गतिविधियों और कारोबारी संबंधों के बारे में पूछताछ की थी। अधिकारियों के अनुसार, उसके जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए, जिसके बाद उसे प्रवेश नहीं देने का निर्णय लिया गया।
कोर्ट ने दस्तावेजों में कई विसंगतियां देखीं
हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों की ओर से सीलबंद लिफाफे में पेश सामग्री का भी अध्ययन किया।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता के माता-पिता और पति से जुड़ी जानकारियों में विसंगतियां पाईं। यह भी दर्ज किया गया कि उसके पास न तो कोई बिजनेस कार्ड था और न ही यात्रा से संबंधित कोई निमंत्रण पत्र। वह अपने देश में किए जा रहे कारोबार की जानकारी भी नहीं दे सकी।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि बिजनेस वीजा लेने के बावजूद उसने अपने पेशे के रूप में गृहिणी लिखा था। उसके द्वारा दिया गया मोबाइल नंबर भी अमान्य पाया गया।
विदेशी नागरिक का प्रवेश संप्रभु निर्णय का विषय
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी विदेशी नागरिक का भारत में प्रवेश राज्य के खिलाफ लागू कराए जा सकने वाला अधिकार नहीं है, बल्कि यह देश के संप्रभु विवेक का विषय है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायिक समीक्षा के दौरान वह सक्षम प्राधिकारी के आकलन की जगह अपना आकलन नहीं रख सकता, विशेष रूप से तब जब फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी गोपनीय सूचनाओं के आधार पर लिया गया हो।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी विदेशी नागरिक को भारत में प्रवेश मांगने का कोई स्वाभाविक या कानूनन लागू कराया जा सकने वाला अधिकार नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट तभी जारी की जा सकती है, जब किसी अधिकार का उल्लंघन हुआ हो।
याचिकाकर्ता के पक्ष में ऐसा कोई लागू करने योग्य अधिकार न पाते हुए हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी।

