चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक निजी एयरलाइन को यात्री से री-शेड्यूलिंग के लिए लिए गए 500 अमेरिकी डॉलर, करीब ₹31,441, वापस करने का निर्देश दिया है। आयोग ने कहा कि जब एयरलाइन खुद इस रकम को रिफंड योग्य मान चुकी थी, तो इसे वापस न करना सेवा में कमी है।
प्रेसिडेंट पवनजीत सिंह और सदस्य मोहन शर्मा की बेंच ने यात्री को मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च के लिए ₹10,000 देने का भी आदेश दिया।
23 सितंबर के आदेश में आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यात्री यह साबित नहीं कर सका कि एयरलाइन ने उसका वापसी का टिकट एकतरफा रद्द किया था। हालांकि, इससे एयरलाइन की उस रकम को वापस करने की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती, जिसे उसने खुद रिफंड योग्य माना था।
शिकागो से दिल्ली के लिए बुक किया था राउंड ट्रिप टिकट
शिकायतकर्ता ने शिकागो से नई दिल्ली आने और वापस जाने के लिए निजी एयरलाइन से 680 अमेरिकी डॉलर में राउंड ट्रिप टिकट बुक किया था।
वह 3 फरवरी 2022 को शिकागो से रवाना हुआ और 4 फरवरी को भारत पहुंचा। उसकी वापसी की यात्रा पहले 28 फरवरी 2022 के लिए तय थी।
शिकायत के अनुसार, कोविड-19 की स्थिति और अपनी तबीयत के कारण उसने एयरलाइन से यात्रा की तारीख बदलने का अनुरोध किया। इसके बाद 25 अप्रैल 2022 की रसीद के जरिए उसकी वापसी की यात्रा 6 जून 2022 के लिए तय कर दी गई।
उसका कहना था कि तबीयत पूरी तरह ठीक न होने के कारण उसने एक बार फिर तारीख बदलने को कहा। इसके बाद वापसी की उड़ान 19 जून 2022 के लिए तय की गई और उससे अतिरिक्त 500 अमेरिकी डॉलर, करीब ₹31,440, लिए गए।
यात्री ने लगाया था टिकट रद्द करने का आरोप
शिकायतकर्ता ने कहा कि बाद में पारिवारिक परिस्थितियों और चंडीगढ़ में रहने वाले अपने बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारियों के कारण उसने यात्रा की तारीख फिर बदलने का अनुरोध किया।
उसका आरोप था कि एयरलाइन स्टाफ ने उचित सहायता नहीं दी और उसकी जानकारी या निर्देश के बिना वापसी का टिकट रद्द कर दिया।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उसे PNR स्टेटस देखने पर टिकट रद्द होने की जानकारी मिली। इसके बाद उसने एयरलाइन के चंडीगढ़ कार्यालय से संपर्क किया, लेकिन उसकी शिकायत का समाधान नहीं हुआ।
उसने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप लगाते हुए रिफंड के साथ आर्थिक नुकसान, मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए मुआवजा मांगा।
एयरलाइन ने टिकट रद्द करने से किया इनकार
एयरलाइन ने यात्री का टिकट रद्द करने और स्टाफ के दुर्व्यवहार के आरोपों से इनकार किया।
एयरलाइन का कहना था कि यात्री ने कई बार वापसी की यात्रा की तारीख बदलने का अनुरोध किया और हर बार उसके टिकट को एडजस्ट किया गया, जबकि अंतिम समय में बदलाव से एयरलाइन को आर्थिक और संचालन संबंधी नुकसान होता है।
एयरलाइन ने यह भी कहा कि बाद में लिए गए 500 अमेरिकी डॉलर की रकम बिना किसी कटौती के उसी भुगतान माध्यम में वापस किए जाने की प्रक्रिया में थी।
एयरलाइन के अनुसार, यात्री 18 जून 2022 को चंडीगढ़ कार्यालय आया था, जबकि उसकी यात्रा 19 जून को निर्धारित थी। उसने अंतिम समय में यात्रा रद्द करने या बदलने की मांग की, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सका।
टिकट रद्द होने का आरोप साबित नहीं हुआ
आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सका, जिससे साबित हो कि एयरलाइन ने उसका वापसी का टिकट एकतरफा रद्द किया था।
इसके विपरीत एयरलाइन ने टिकट का स्टेटस पेश किया, जिसमें वह “ओपन फॉर यूज” दिखाया गया था। इस आधार पर आयोग ने कहा कि टिकट रद्द किए जाने का आरोप साबित नहीं हुआ।
हालांकि, आयोग ने यह भी पाया कि एयरलाइन ने खुद स्वीकार किया था कि री-शेड्यूलिंग के लिए लिए गए 500 अमेरिकी डॉलर वापस किए जाने थे। इसके बावजूद एयरलाइन ऐसा कोई रिकॉर्ड पेश नहीं कर सकी, जिससे यह साबित हो कि रकम वास्तव में यात्री को लौटा दी गई थी।
आयोग ने कहा कि केवल इसलिए एयरलाइन अपनी रिफंड की जिम्मेदारी से नहीं बच सकती कि शिकायतकर्ता टिकट रद्द किए जाने का आरोप साबित नहीं कर पाया।
इसके बाद आयोग ने एयरलाइन को 500 अमेरिकी डॉलर, करीब ₹31,441, वापस करने और मानसिक परेशानी तथा मुकदमे के खर्च के लिए ₹10,000 देने का निर्देश दिया।

