क्रेडिट कार्ड फीस विवाद में SBI Cards को झटका, कार्ड बंद करने और ₹50,000 मुआवजा देने का आदेश

दिल्ली की एक उपभोक्ता आयोग ने SBI Cards & Payment Services Limited को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए एक महिला का क्रेडिट कार्ड बंद करने और उसे ₹50,000 मुआवजा देने का आदेश दिया है। महिला का आरोप था कि उसने ₹499 वार्षिक शुल्क वाला क्रेडिट कार्ड चुना था, लेकिन उसे ₹2,999 वार्षिक शुल्क वाला कार्ड जारी कर दिया गया।

डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन, साउथ-II, दिल्ली की अध्यक्ष मोनिका अग्रवाल श्रीवास्तव और सदस्य डॉ. राजेंद्र धर तथा रितु गरोडिया की पीठ ने नेहा चौधरी की शिकायत पर यह आदेश दिया।

चौधरी के अनुसार, उन्होंने ‘Simply Click’ क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन किया था, जिस पर ₹499 के साथ GST वार्षिक शुल्क था। लेकिन कंपनी के एजेंट ने कथित तौर पर उनका बायोमेट्रिक KYC ‘Club Vistara’ कार्ड के लिए कर लिया। इसके बाद उन्हें ₹73,000 की क्रेडिट लिमिट वाला कार्ड जारी किया गया, जिस पर ₹2,999 के साथ GST वार्षिक शुल्क था।

3 अगस्त 2023 के बिल में ₹2,999 वार्षिक शुल्क और ₹592.32 GST दिखाया गया था।

कार्ड बदलने के लिए कई बार किया संपर्क

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4 अगस्त 2023 को चौधरी ने SBI Cards को ईमेल भेजकर बताया कि उन्होंने कार्ड का इस्तेमाल नहीं किया है और इसे Simply Save कार्ड में बदलने का अनुरोध किया।

10 अगस्त को SBI Cards ने जवाब दिया कि उसके प्रतिनिधि उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर संपर्क नहीं कर पाए। कंपनी ने कहा कि कार्ड को अपग्रेड या डाउनग्रेड करने के लिए OTP सत्यापन जरूरी है और उन्हें प्रतिनिधि की कॉल लेने या हेल्पलाइन से संपर्क करने को कहा गया।

इसके बाद चौधरी ने कंपनी को बताया कि उन्होंने हेल्पलाइन पर संपर्क किया, लेकिन कार्ड नहीं बदला गया। 11 अगस्त को उन्होंने कहा कि कई बार कॉल करने के बावजूद उन्हें बताया गया कि न तो कार्ड बदला जा सकता है और न ही शुल्क माफ किया जा सकता है। उन्होंने कंपनी को यह भी बताया कि उन्होंने RBI Ombudsman से शिकायत की है।

18 अगस्त को SBI Cards ने उन्हें सूचित किया कि कार्ड डाउनग्रेड करने का अनुरोध पूरा नहीं किया जा सकता। उसी दिन चौधरी ने कंपनी को ईमेल के जरिए कानूनी नोटिस भेजा।

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आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता ने ईमेल और हेल्पलाइन के जरिए कई बार संपर्क किया, लेकिन आखिरकार बिना कोई कारण बताए उन्हें बताया गया कि कार्ड डाउनग्रेड नहीं किया जा सकता।

SBI Cards ने आरोपों का जवाब नहीं दिया

आयोग ने दर्ज किया कि SBI Cards न तो कार्यवाही में पेश हुआ और न ही शिकायतकर्ता के आरोपों का खंडन किया। कंपनी का लिखित जवाब समय सीमा के बाद दाखिल होने के कारण 24 अक्टूबर 2024 के आदेश के तहत रिकॉर्ड पर नहीं लिया गया।

मामले पर फैसला करते हुए आयोग ने फरवरी 2026 के कर्नाटक स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन के एक फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें 21 अप्रैल 2022 के RBI निर्देशों का जिक्र था।

इन निर्देशों के अनुसार, बकाया राशि के भुगतान के अधीन क्रेडिट कार्ड बंद करने का अनुरोध सात कार्य दिवसों के भीतर पूरा किया जाना चाहिए। कार्ड जारी करने वाली कंपनियों को ऐसे अनुरोध के लिए कई माध्यम भी उपलब्ध कराने होते हैं।

यदि कोई बकाया नहीं है और सात कार्य दिवसों के भीतर कार्ड बंद नहीं किया जाता, तो देरी पर ₹500 प्रतिदिन का जुर्माना लगाया जा सकता है।

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आयोग ने 18 सितंबर के अपने आदेश में कहा कि यदि कार्ड को डाउनग्रेड नहीं किया जा सकता था, तो उसे बंद क्यों नहीं किया गया, यह समझ से परे है।

कार्ड बंद करने और मुआवजा देने का आदेश

आयोग ने SBI Cards को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए चौधरी का क्रेडिट कार्ड बंद करने का निर्देश दिया।

इसके साथ ही कंपनी को 4 अगस्त 2023 की स्थिति के अनुसार बिल तैयार करने को कहा गया, बशर्ते वह बिल पहले से भुगतान न किया गया हो।

आयोग ने SBI Cards को शिकायतकर्ता को ₹50,000 मुआवजा देने का भी आदेश दिया।

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