सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 5 अक्टूबर को टाटा केमिकल्स को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए कंपनी के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी। यह मामला गुजरात स्थित कच्छ की खाड़ी समुद्री अभयारण्य में कथित पर्यावरणीय क्षति से जुड़ा है। शीर्ष अदालत का यह निर्देश गुजरात हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर अपील पर आया है, जिसमें कंपनी को समुद्री अभयारण्य क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने का जिम्मेदार ठहराया गया था।
हाईकोर्ट का आदेश और हर्जाने से जुड़े निर्देश
यह विवाद गुजरात हाईकोर्ट के 25 मई के उस फैसले से उपजा है, जिसमें अदालत ने टाटा केमिकल्स द्वारा वर्ष 2006 में दाखिल याचिका खारिज कर दी थी। इस याचिका के जरिए कंपनी ने जिला कलेक्टर के एक आदेश को चुनौती दी थी और देवभूमि द्वारका जिले में स्थित अपने मीठापुर संयंत्र के समीप लगभग 200 हेक्टेयर के अंतर-ज्वारीय क्षेत्र (इंटरटाइडल जोन) में औद्योगिक अपशिष्ट जल छोड़ने के पुराने अधिकार को मान्यता देने की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने वर्ष 1987 से पहले के खुले नालों के जरिए अपशिष्ट बहाने के कंपनी के दावे को अस्वीकार कर दिया। अदालत ने कंपनी को अभयारण्य की सीमा के भीतर सरकारी जमीन पर अतिक्रमणकारी करार दिया। साथ ही यह भी कहा कि जब तक पर्यावरण को पहुंचे नुकसान की पूरी भरपाई नहीं हो जाती, तब तक क्षतिपूर्ति राशि चुकाना कंपनी का निरंतर दायित्व रहेगा। हाईकोर्ट ने गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जीपीसीबी) को एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया था, जिसे तीन महीने के भीतर नुकसान का आकलन करने, सुधारात्मक कदम सुझाने और देय मुआवजे की राशि तय करने का काम सौंपा गया था।
कंपनी का पक्ष और संयंत्र संचालन की स्थिति
हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद टाटा केमिकल्स ने कहा था कि वह इस आदेश का विधिक परीक्षण कर रही है और आगे के कानूनी विकल्पों पर विचार करेगी। कंपनी के अनुसार, जीपीसीबी की ओर से औपचारिक मूल्यांकन पूरा होने से पहले संभावित वित्तीय देनदारी का सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
इसके साथ ही कंपनी ने स्पष्ट किया कि संयंत्र का दैनिक विनिर्माण कार्य सामान्य रूप से जारी है। कंपनी का कहना है कि 1987 से पहले के पुराने खुले नालों का उपयोग बंद किया जा चुका है और उनके स्थान पर एक बंद गहरे समुद्री पाइपलाइन नेटवर्क का संचालन किया जा रहा है, जो सभी वैधानिक एवं पर्यावरणीय नियमों के अनुरूप कार्य करता है।
अभयारण्य की पृष्ठभूमि और शेयर बाजार का रुख
कच्छ की खाड़ी देश का पहला समुद्री राष्ट्रीय उद्यान है। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित इस संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र में 42 द्वीप, प्रवाल भित्तियां (कोरल रीफ), मैंग्रोव वन और मडफ्लैट्स शामिल हैं। दूसरी ओर, वर्ष 1939 से संचालित मीठापुर संयंत्र में सोडा ऐश, नमक, सीमेंट, सोडियम बाइकार्बोनेट, ब्रोमीन और कास्टिक सोडा का उत्पादन होता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 5 अक्टूबर को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर टाटा केमिकल्स का शेयर 2.16 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹620.90 पर बंद हुआ। हालांकि इस तेजी के बावजूद, मौजूदा वर्ष में अब तक शेयर लगभग 18 प्रतिशत फिसल चुका है और पिछले 12 महीनों की अवधि में इसमें 33 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।

