सुप्रीम कोर्ट ने 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से सोमवार को साफ इनकार कर दिया। अदालत ने नई व्यवस्था को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस तो जारी किया, लेकिन सरकार का आधिकारिक जवाब दाखिल होने तक नियमों के अमल पर रोक लगाने की याचिकाकर्ता की मांग को खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला कानूनी कम और तकनीकी अधिक है।
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार द्वारा कुछ मर्चेंट लेन-देन पर दोबारा प्रोसेसिंग शुल्क लागू किए जाने के फैसले के खिलाफ यह जनहित याचिका वकील अंजन दत्ता ने दायर की थी।
अदालत में केंद्र की दलील और 96 फीसदी उपभोक्ताओं को राहत
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमण ने पीठ को आश्वस्त किया कि यूपीआई का उपयोग करने वाले 96 प्रतिशत लोग इस नए शुल्क के दायरे से पूरी तरह बाहर रहेंगे।
केंद्र सरकार ने बीते मंगलवार (15 सितंबर) को इस नए शुल्क ढांचे की घोषणा की थी। इसके साथ ही निर्दिष्ट लेन-देन पर पिछले करीब छह साल से चली आ रही शून्य एमडीआर (जीरो एमडीआर) की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। यह नया नियम 15 अक्टूबर से प्रभावी होने जा रहा है। गौरतलब है कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) वह व्यावसायिक शुल्क है जो व्यापारी डिजिटल भुगतान को संभव बनाने वाले बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और थर्ड-पार्टी ऐप्स को चुकाते हैं।
शुल्क की दरें और प्रमुख क्षेत्रों को विशेष रियायत
नई व्यवस्था के तहत किसी व्यापारी को 2,000 रुपये से अधिक का यूपीआई भुगतान करने पर सामान्य तौर पर 0.4 प्रतिशत की एकसमान दर से एमडीआर लगेगा। हालांकि, 75,000 रुपये और उससे अधिक मूल्य के बड़े लेन-देन के लिए इस शुल्क की अधिकतम सीमा (कैप) 300 रुपये तय की गई है।
कम मुनाफे और आवश्यक सेवाओं वाले विशिष्ट क्षेत्रों को इस प्रतिशत-आधारित शुल्क से छूट दी गई है। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि से जुड़े उत्पादों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर प्रतिशत के बजाय प्रति लेन-देन 5 रुपये का एकमुश्त (फ्लैट) शुल्क ही लिया जाएगा।
इसके अलावा म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, शेयर दलालों और डीलरों से जुड़े लेन-देन पर 0.02 प्रतिशत की रियायती दर से एमडीआर लागू होगा, जिसमें अधिकतम शुल्क की सीमा 300 रुपये ही रहेगी।
आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा असर, पी2पी ट्रांसफर रहेंगे पूरी तरह मुफ्त
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह शुल्क केवल मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम के भीतर ही लागू होगा और आम उपभोक्ताओं पर इसका कोई वित्तीय बोझ नहीं डाला जाएगा। मंत्रालय ने बैंकों को परामर्श दिया है कि वे व्यापारियों द्वारा इस शुल्क को ग्राहकों पर अंतरित (पास ऑन) किए जाने की कोशिशों को रोकें। साथ ही यूपीआई ऐप प्रदाताओं को किसी भी प्रकार का प्लेटफॉर्म शुल्क या छिपा हुआ शुल्क (हिडन चार्ज) वसूलने से सख्त रूप से प्रतिबंधित किया गया है।
वहीं दूसरी ओर, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (पी2पी) के बीच होने वाले सामान्य यूपीआई ट्रांसफर पर पहले की तरह कोई शुल्क नहीं लगेगा, चाहे लेन-देन की राशि कितनी भी हो। कुल यूपीआई लेन-देन की संख्या में पी2पी ट्रांसफर की हिस्सेदारी करीब 37 प्रतिशत और कुल मूल्य में लगभग 70 प्रतिशत है।

