सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैकेज चेतावनी लेबल लागू करने की प्रस्तावित समयसीमा को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से सवाल किए। कोर्ट ने पूछा कि जब मामला नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़ा है, तो इसके क्रियान्वयन में इतना समय क्यों लिया जा रहा है।
जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने FSSAI की प्रस्तावित व्यवस्था पर सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया। इस व्यवस्था के तहत अधिक चीनी, वसा और नमक वाले पैकेज्ड खाद्य उत्पादों पर लाल रंग का चेतावनी चिन्ह लगाने का प्रस्ताव है।
कोर्ट ने खास तौर पर नियमों की अधिसूचना के बाद खाद्य कारोबारियों को 365 दिन की स्वैच्छिक अनुपालन अवधि देने के प्रस्ताव पर सवाल उठाया।
बेंच ने कहा कि उसने अब तक उठाए गए कदमों और पहल की सराहना की है, लेकिन इस पूरी कवायद को सार्थक बनाने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि दोबारा आपत्तियां और सुझाव मांगने की प्रक्रिया शुरू करने की क्या जरूरत है और 2022 से अब तक क्या किया गया।
2022 के प्रस्ताव से अलग है नई व्यवस्था
FSSAI की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि 2022 में इंडियन न्यूट्रिशन रेटिंग यानी INR स्टार-रेटिंग प्रणाली पर काम शुरू किया गया था और उस समय अपनाए गए मानदंड मौजूदा प्रस्ताव से अलग थे।
अब FSSAI ने ऐसे पैकेज्ड खाद्य उत्पादों पर लाल षट्कोणीय चेतावनी चिन्ह लगाने का प्रस्ताव दिया है, जिनमें चिंता वाले पोषक तत्व, जैसे चीनी, वसा और नमक, अधिक मात्रा में हों। यह लाल षट्कोण सफेद चौकोर पृष्ठभूमि पर पैकेट के सामने लगाया जाएगा।
FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ड्राफ्ट नियम जारी करने और उन्हें अंतिम रूप देने में लगभग चार महीने लगेंगे।
प्रस्तावित संशोधित नियमों को 60 दिनों के लिए प्रकाशित किया जाएगा, ताकि घरेलू स्तर पर और विश्व व्यापार संगठन के मंच के जरिए संबंधित पक्षों से टिप्पणियां और सुझाव लिए जा सकें।
नियमों की अधिसूचना के बाद FSSAI ने खाद्य कारोबारियों को 365 दिनों की स्वैच्छिक अनुपालन अवधि देने का प्रस्ताव रखा है।
चेतावनी लेबल पर कोर्ट पहले भी मांग चुका है स्पष्टीकरण
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी FSSAI से पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग को चरणबद्ध तरीके से लागू करने और वसा, चीनी तथा नमक से जुड़े चेतावनी लेबल पर और स्पष्टीकरण देने को कहा था।
मामला सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट 3S and Our Health Society की याचिका से जुड़ा है। याचिका में केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग के तहत खाद्य पैकेट के सामने पोषण संबंधी जानकारी दी जाती है, ताकि उपभोक्ता खाद्य उत्पाद खरीदते समय बेहतर और अधिक जानकारी के आधार पर फैसला कर सकें।
FSSAI ने पहले भी सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह अधिक मात्रा में अतिरिक्त सैचुरेटेड फैट, अतिरिक्त चीनी और नमक वाले खाद्य उत्पादों के लिए सामने की ओर स्पष्ट लाल चेतावनी लेबल देने का प्रस्ताव कर रहा है।
पिछले महीने दाखिल अनुपालन हलफनामे में FSSAI ने कहा था कि दो चरणों वाली यह व्यवस्था उपभोक्ताओं को ऐसे खाद्य उत्पादों के बारे में सरल, स्पष्ट और आसानी से समझ आने वाली चेतावनी देने के लिए तैयार की गई है, जिनमें तय पोषक तत्व अधिक मात्रा में मौजूद हैं।
हलफनामे में यह भी कहा गया कि चरणबद्ध तरीके से व्यवस्था लागू करने का उद्देश्य उपभोक्ताओं के बीच इसे स्वीकार्य बनाना और खाद्य उद्योग को उत्पादों में जरूरी बदलाव करने के लिए पर्याप्त समय देना है।

