ठाणे जिले के एक नगर निकाय अस्पताल में डॉक्टरों के साथ कथित मारपीट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शिवसेना नगरसेवक रमेश म्हात्रे को दी गई जमानत पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने म्हात्रे को अगले तीन दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करने का कड़ा निर्देश जारी किया।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 7 अगस्त के उस फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार की अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया, जिसके तहत म्हात्रे को जमानत दी गई थी।
डॉक्टरों पर हमला कतई बर्दाश्त नहीं: सुप्रीम कोर्ट
मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने चिकित्सा जगत की सुरक्षा पर जोर देते हुए सख्त रुख अपनाया। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समाज में यह संदेश पूरी तरह साफ जाना चाहिए कि मेडिकल बिरादरी को हाथ नहीं लगाया जा सकता। कोर्ट ने टिप्पणी की कि डॉक्टर आम जनता की सेवा करते हैं और उन पर इस तरह के शारीरिक हमले किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। इसके अलावा, अदालत ने इस बात का भी संज्ञान लिया कि म्हात्रे से जुड़े इस प्रकरण के बाद उसी राजनीतिक दल से संबंधित एक और ऐसी ही घटना सामने आई थी।
सुनवाई के दौरान पीठ ने म्हात्रे के आपराधिक रिकॉर्ड को रेखांकित करते हुए कहा कि उनके खिलाफ वर्तमान मामले सहित कुल 19 आपराधिक मुकदमे दर्ज रहे हैं।
बचाव पक्ष ने दी राजनीतिक साजिश और 18 मामलों में बरी होने की दलील
म्हात्रे की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ दर्ज सभी शिकायतें राजनीति से प्रेरित थीं। उन्होंने दलील दी कि म्हात्रे उन 19 मामलों में से 18 में पहले ही बरी हो चुके हैं।
वरिष्ठ वकील ने अदालत को यह भी अवगत कराया कि निचली अदालत में मुकदमा बिना किसी बाधा के सामान्य रूप से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि मामले में दो गवाहों के बयान पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं और मुख्य शिकायतकर्ता महिला डॉक्टर का बयान 3 अक्टूबर को दर्ज होना तय है। बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट द्वारा मुकदमे की त्वरित सुनवाई के दिए गए निर्देश का हवाला दिया, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह जमानत आदेश पर रोक लगाते हुए त्वरित सुनवाई से जुड़ी टिप्पणी पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रहा है।
शास्त्री नगर अस्पताल की घटना की पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद 6 जुलाई को ठाणे के शास्त्री नगर अस्पताल में हुई एक घटना से जुड़ा है। अस्पताल में भर्ती एक गर्भवती महिला के परिजनों ने डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर उपचार में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया था। इस विवाद के बाद रमेश म्हात्रे अन्य लोगों के साथ अस्पताल पहुंचे और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों के साथ कथित रूप से हाथापाई व मारपीट की।
जुलाई में हुई इस घटना के बाद पूरे राज्य में भारी जनआक्रोश देखने को मिला था। बाद में, 7 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट ने म्हात्रे के साथ चार अन्य सह-आरोपियों को जमानत दे दी थी और संबंधित अदालत को मामले का ट्रायल समयबद्ध तरीके से तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया था।

