पानी, नमक और चीनी की प्लास्टिक पैकिंग पर लिखनी होगी सूक्ष्म प्लास्टिक की चेतावनी; मद्रास हाईकोर्ट के आदेश में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें निर्देश दिया गया था कि पानी, नमक और चीनी बेचने के लिए उपयोग की जाने वाली सभी पीईटी (PET) बोतलों और प्लास्टिक पैकेजिंग पर एक लेबल होना चाहिए। इस लेबल पर स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए कि इन खाद्य पदार्थों में “माइक्रो/नैनो प्लास्टिक हो सकता है”।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इस तरह की चेतावनी प्रदर्शित करने में “कुछ भी गलत नहीं है”। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि खाद्य वस्तुओं में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी के बारे में जनता को जागरूक करना आवश्यक है।

यह मामला ‘पीईटी पैकेजिंग एसोसिएशन फॉर क्लीन एनवायरमेंट’ द्वारा दायर एक याचिका के माध्यम से शीर्ष अदालत में पहुंचा था। एसोसिएशन ने मद्रास हाईकोर्ट के फरवरी 2026 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) को चार सप्ताह के भीतर उचित अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया गया था।

मद्रास हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि निर्माताओं को पानी बेचने वाली सभी प्लास्टिक/पीईटी बोतलों के साथ-साथ चीनी और नमक की प्लास्टिक पैकेजिंग पर मोटे और लाल रंग के अक्षरों में एक लेबल लगाना होगा। इस लेबल पर चेतावनी दी जानी थी: “इस [पानी/चीनी/नमक] में माइक्रो/नैनो प्लास्टिक हो सकता है।”

सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता संगठन के वकील ने तर्क दिया कि इस तरह की चेतावनी से उपभोक्ताओं के बीच “घबराहट” (panic) पैदा हो सकती है। हालांकि, पीठ इस तर्क से सहमत नहीं हुई और कहा कि वर्तमान बाजार उपभोक्ता-आधारित है और लोग स्वास्थ्य के प्रति सजग हो रहे हैं।

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पीठ ने टिप्पणी की, “सरकार भले ही इस मामले में देरी कर रही हो, लेकिन हाईकोर्ट इस पर बहुत सकारात्मक है क्योंकि रिपोर्टों ने माइक्रोप्लास्टिक की उपस्थिति का सुझाव दिया है… जनता को जागरूक होने दें।”

जस्टिस विक्रम नाथ ने यह भी रेखांकित किया कि उपभोक्ताओं का व्यवहार पहले से ही बदल रहा है। उन्होंने कहा, “लोग जांच कर रहे हैं और प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग कम कर रहे हैं। इसमें [चेतावनी प्रदर्शित करने में] कुछ भी गलत नहीं है।”

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सुप्रीम कोर्ट ने ध्यान दिलाया कि यह मुख्य मामला अभी भी हाईकोर्ट के समक्ष लंबित है। शीर्ष अदालत की इन मौखिक टिप्पणियों के बाद, याचिकाकर्ताओं के वकील ने अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी।

अदालत ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी और याचिकाकर्ताओं को अपनी शिकायतों के साथ फिर से हाईकोर्ट जाने की छूट प्रदान की।

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