सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगा साजिश मामले के आरोपी मीरान हैदर को शादी के मद्देनजर बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत शर्तों में ढील देते हुए पुलिस थाने में हाजिरी दर्ज कराने की अनिवार्यता को हफ्ते में दो दिन से घटाकर सिर्फ एक दिन कर दिया है। इसके साथ ही विवाह कार्यक्रम के चलते अदालत ने उन्हें दो निर्धारित तारीखों पर पेशी से पूरी छूट प्रदान की है।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने निर्देश दिया कि हैदर अब प्रत्येक शनिवार को सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे के बीच क्राइम ब्रांच पुलिस थाने में जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि 17 अक्टूबर को होने वाले विवाह को देखते हुए उन्हें 17 अक्टूबर और 24 अक्टूबर को थाने में उपस्थित होने से छूट रहेगी।
सुनवाई के दौरान हैदर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल ने विवाह का हवाला देकर शर्तों में संशोधन की मांग की थी। उन्होंने पीठ को अवगत कराया कि ट्रायल कोर्ट इस तरह की राहत देने की स्थिति में नहीं है। वहीं, दिल्ली पुलिस का पक्ष रख रहे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस.वी. राजू ने जमानत शर्तों में दी जा रही इस ढील का कोई विरोध नहीं किया।
सोशल मीडिया और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर रोक जारी रहेगी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हैदर पर पूर्व में लगाई गई अन्य सभी जमानत शर्तें ट्रायल पूरा होने तक यथावत लागू रहेंगी। इन शर्तों के तहत, हैदर के सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की सामग्री पोस्ट करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा, वह व्यक्तिगत या वर्चुअल किसी भी माध्यम से किसी भी रैली, सभा, बैठक या सार्वजनिक कार्यक्रम में न तो भाग ले सकते हैं और न ही उसे संबोधित कर सकते हैं।
इससे पहले 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मीरान हैदर के साथ चार अन्य कार्यकर्ताओं—गुलफिशा फातिमा, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद—को 11 शर्तों के साथ जमानत दी थी। उस दौरान अदालत ने आगाह किया था कि स्वतंत्रता के किसी भी दुरुपयोग पर जमानत रद्द कर दी जाएगी। जनवरी के आदेश के तहत इन सभी आरोपियों को हर सोमवार और गुरुवार सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे के बीच जय सिंह मार्ग स्थित पुलिस मुख्यालय में क्राइम ब्रांच के एसएचओ के समक्ष उपस्थित होना अनिवार्य किया गया था। एसएचओ को प्रत्येक आरोपी के लिए अलग रजिस्टर रखने और ट्रायल कोर्ट को हर महीने अनुपालन रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया गया था।
उमर खालिद और शरजील इमाम को नहीं मिली थी राहत
इसी मामले में 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सह-आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। अदालत ने प्रथम दृष्टया उनके खिलाफ लगे आरोपों को सही मानते हुए राहत देने से इनकार कर दिया था। पीठ ने कहा था कि वर्ष 2020 से हिरासत में मौजूद खालिद और इमाम संरक्षित गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद अथवा एक वर्ष की अवधि पूरी होने पर दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ा है। उस हिंसा में 53 लोगों की जान चली गई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।
दिल्ली पुलिस ने इस कथित साजिश के सिलसिले में 18 लोगों को गिरफ्तार किया था और उन पर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) तथा भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के तहत साजिश रचने का मामला दर्ज किया था। इन 18 आरोपियों में से अब तक 11 को जमानत मिल चुकी है।
हिरासत में मौजूद आरोपियों में शरजील इमाम को सबसे पहले 28 जनवरी 2020 को सीएए विरोधी भाषणों के आरोप में पकड़ा गया था, जिसके बाद अगस्त 2020 में उन्हें मुख्य साजिश मामले में औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। वहीं, उमर खालिद को 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था। उन पर तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले आधिकारिक भारत दौरे के दौरान 24 और 25 फरवरी को भड़काऊ भाषण देने का आरोप है।

