ब्रेकिंग: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) को सीमा शुल्क अधिनियम के तहत कारण बताओ नोटिस जारी करने का अधिकार दिया

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने आज एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) के अधिकारियों को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी करने और शुल्क वसूलने का अधिकार है। यह निर्णय, जो कैनन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड बनाम सीमा शुल्क आयुक्त में न्यायालय के 2021 के फैसले को पलट देता है, पुष्टि करता है कि DRI अधिकारियों को अधिनियम की धारा 28 के तहत “उचित अधिकारी” माना जाता है और वे कारण बताओ नोटिस जारी करने के लिए अधिकार क्षेत्र का प्रयोग कर सकते हैं।

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ द्वारा दिया गया यह निर्णय न केवल DRI अधिकारियों बल्कि सीमा शुल्क-निवारक आयोगों और केंद्रीय उत्पाद शुल्क खुफिया महानिदेशालय जैसी अन्य एजेंसियों की शक्तियों को भी मान्य करता है।

न्यायालय का तर्क

न्यायमूर्ति पारदीवाला, जिन्होंने निर्णय सुनाया, ने कहा कि कैनन इंडिया पर निर्णय कुछ महत्वपूर्ण परिपत्रों और अधिसूचनाओं पर विचार किए बिना लिया गया था। इनमें शामिल हैं:

1. 1999 में जारी परिपत्र संख्या 4/99, जिसने डीआरआई अधिकारियों को धारा 28 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी करने का अधिकार दिया।

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2. 2011 की अधिसूचना संख्या 44/2011, जिसने धारा 17 और 28 के प्रयोजनों के लिए डीआरआई अधिकारियों को “उचित अधिकारी” के रूप में नामित किया।

न्यायालय ने माना कि इन दस्तावेजों पर कैनन इंडिया में विचार किया जाना चाहिए था, जिससे पहले के निर्णय की वैधता प्रभावित हुई। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने रेखांकित किया कि वित्त मंत्रालय की 1990 की अधिसूचना के माध्यम से डीआरआई अधिकारियों को औपचारिक रूप से सीमा शुल्क अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था, जिसे बाद में 2002 में एक अन्य अधिसूचना द्वारा सुदृढ़ किया गया।*

लंबित मामलों के लिए निहितार्थ

यह निर्णय विभिन्न कानूनी मंचों पर चल रहे मामलों से निपटने के लिए स्पष्ट निर्देश प्रदान करता है:

– हाईकोर्ट की चुनौतियाँ: डीआरआई द्वारा शुरू किए गए कारण बताओ नोटिस को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं का वर्तमान निर्णय के अनुरूप समाधान किया जाएगा, तथा नोटिस को निर्णय के लिए बहाल किया जाएगा।

– सर्वोच्च न्यायालय की अपीलें: सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित अपीलें नए निर्णय का पालन करेंगी, जिसमें अपीलकर्ताओं को केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (सीईटीएसटीएटी) में अपील प्रस्तुत करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया जाएगा।

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– क्षेत्राधिकार संबंधी आपत्तियाँ: क्षेत्राधिकार के आधार पर डीआरआई अधिकारियों के अधिकार पर सवाल उठाने वाले मामलों की सर्वोच्च न्यायालय के नवीनतम निर्देशों के तहत समीक्षा की जाएगी, जिसमें अपील करने वाले पक्षों के लिए प्रासंगिक समय विस्तार प्रदान किया जाएगा।

कैनन इंडिया के फैसले की पृष्ठभूमि

कैनन इंडिया में 2021 के मूल फैसले में कहा गया था कि डीआरआई अधिकारी सीमा शुल्क अधिनियम के तहत “उचित अधिकारी” के रूप में योग्य नहीं हैं, जब तक कि केंद्र सरकार उन्हें धारा 6 के तहत स्पष्ट रूप से अधिकार न सौंपे। सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि केवल वह सीमा शुल्क अधिकारी जिसने प्रारंभिक मूल्यांकन किया था, धारा 28 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर सकता है, जिससे डीआरआई की प्रवर्तन शक्तियों को प्रभावी रूप से सीमित कर दिया गया।

इस मिसाल के कारण व्यापक चुनौतियाँ सामने आईं, जिसमें कई हाईकोर्ट और न्यायाधिकरणों ने धारा 28 के तहत डीआरआई द्वारा शुरू की गई कार्यवाही को अमान्य करार दिया। सीमा शुल्क विभाग ने जवाब में एक समीक्षा याचिका दायर की, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय से डीआरआई अधिकारियों की शक्तियों पर अपने रुख पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया गया।

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प्रस्तुत किए गए मुख्य तर्क

– सीमा शुल्क विभाग का रुख: अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने सीमा शुल्क विभाग के लिए तर्क दिया, जिसमें कहा गया कि 1977 से, डीआरआई अधिकारी वित्त मंत्रालय के भीतर एक विशेष वर्ग के रूप में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कैनन इंडिया में कई कथित त्रुटियों को भी उजागर किया, और कहा कि निर्णय में स्थापित कानूनी प्रावधानों और मिसालों की अनदेखी की गई है।

– प्रतिवादियों का दृष्टिकोण: प्रतिवादियों का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने समीक्षा याचिका का विरोध किया, और तर्क दिया कि कैनन इंडिया कानूनी रूप से सही है और पुनर्विचार की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि एक अलग न्यायिक व्याख्या एक “स्पष्ट त्रुटि” का गठन नहीं करती है जो समीक्षा को उचित ठहराती है।

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