भाजपा उम्मीदवार से पुलिस ऑब्जर्वर की मुलाकात पर विवाद: कलकत्ता हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को टीएमसी की शिकायत निपटाने को कहा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान दक्षिण 24 परगना जिले में एक पुलिस ऑब्जर्वर और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार की मुलाकात को लेकर उठे विवाद में कलकत्ता हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप किया है। कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को निर्देश दिया है कि वह तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा इस संबंध में दर्ज कराई गई शिकायत का औपचारिक रूप से निस्तारण करे। टीएमसी ने आरोप लगाया था कि उक्त अधिकारी ने चुनावी नियमों का उल्लंघन करते हुए भाजपा उम्मीदवार के साथ ‘अनौपचारिक’ बैठक की थी।

यह विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान तब शुरू हुआ जब दक्षिण 24 परगना के चार निर्वाचन क्षेत्रों—मघराहाट पूर्व, मघराहाट पश्चिम, डायमंड हार्बर और फालता—के लिए नियुक्त पुलिस ऑब्जर्वर पर गंभीर आरोप लगे। टीएमसी ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर उक्त अधिकारी को पुलिस ऑब्जर्वर की भूमिका से हटाने की मांग की थी।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि डायमंड हार्बर के एक सरकारी पर्यटक आवास (टूरिस्ट लॉज) में प्रवास के दौरान अधिकारी ने मघराहाट पश्चिम सीट से भाजपा उम्मीदवार के साथ एक निजी और व्यक्तिगत बैठक की। टीएमसी का तर्क था कि इस तरह की मुलाकात से पुलिस ऑब्जर्वर की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं और यह चुनावी प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है।

याचिकाकर्ता (TMC): टीएमसी ने कोर्ट में दलील दी कि यह बैठक “निजी और अनौपचारिक” थी, जिससे संवेदनशील दक्षिण 24 परगना जिले में चुनावी प्रक्रिया की शुचिता को लेकर चिंता पैदा हुई है। पार्टी ने मांग की कि चारों विधानसभा क्षेत्रों में निष्पक्ष चुनावी माहौल सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी को तुरंत पद से हटाया जाए।

प्रतिवादी (चुनाव आयोग): चुनाव आयोग का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने इन आरोपों को “निराधार” बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुलाकात पर्यटक आवास के निर्धारित सम्मेलन कक्ष (कॉन्फ्रेंस रूम) में आधिकारिक क्षमता में हुई थी।

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आयोग के वकील ने ‘ऑब्जर्वर हैंडबुक’ के क्लॉज 3 के सब-क्लॉज 3 का हवाला दिया, जिसमें प्रावधान है कि पुलिस ऑब्जर्वर चुनाव के दौरान आयोग की “आंख और कान” के रूप में कार्य करता है। वकील ने कहा:

“एक पुलिस ऑब्जर्वर को जनता के साथ-साथ उम्मीदवारों से भी मिलना होता है और आयोग को रिपोर्ट सौंपनी होती है।”

आयोग ने आगे कहा कि इस मुलाकात में कुछ भी “गोपनीय” नहीं था, क्योंकि ऑब्जर्वर ने अपने आधिकारिक कर्तव्यों के हिस्से के रूप में अन्य लोगों की मौजूदगी में उम्मीदवार से मुलाकात की थी।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, जस्टिस कृष्ण राव ने अधिकारी को हटाने का कोई आदेश जारी नहीं किया, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि प्रशासनिक शिकायत का समाधान किया जाना आवश्यक है। कोर्ट ने चुनाव आयोग के इस पक्ष को संज्ञान में लिया कि यह मुलाकात एक सामान्य प्रक्रियात्मक बातचीत थी।

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कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग से “अनुरोध” किया कि वह टीएमसी की लंबित शिकायत का निस्तारण करे और अपने आदेश की जानकारी याचिकाकर्ता को दे।

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