केंद्र ने पटना हाई कोर्ट में 7 नए जजों की नियुक्ति की; दो उम्मीदवारों की मंजूरी लंबित

केंद्र सरकार ने बुधवार को पटना हाई कोर्ट के जजों के रूप में 7 अधिवक्ताओं की नियुक्ति को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया, जिससे राज्य के इस सबसे बड़े कोर्ट की न्यायिक क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है।

यह आधिकारिक अधिसूचना फरवरी में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा पदोन्नति के लिए 9 अधिवक्ताओं की सूची की सिफारिश किए जाने के बाद आई है। हालांकि, कार्यपालिका ने इन नियुक्तियों की मंजूरी को 2 हिस्सों में विभाजित कर दिया है, जिसके तहत फिलहाल 2 अनुशंसित अधिवक्ताओं की नियुक्ति को रोक कर रखा गया है।

नई नियुक्तियां: स्थायी और एडिशनल जज

नवनियुक्त 7 न्यायिक अधिकारियों को स्थायी और एडिशनल जजों की श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार:

स्थायी जज के रूप में नियुक्त:

  1. रंजन कुमार झा
  2. कुमार मनीष
  3. राज कुमार
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एडिशनल जज के रूप में नियुक्त:

  1. राणा विक्रम सिंह
  2. विकास कुमार
  3. गिरीजीश कुमार
  4. आलोक कुमार

एडिशनल जजों को आमतौर पर 2 वर्ष की अवधि के लिए नियुक्त किया जाता, जिसके बाद उनके प्रदर्शन, रिक्ति की उपलब्धता और हाई कोर्ट प्रशासन व कॉलेजियम की अगली सिफारिशों के आधार पर उन्हें स्थायी जज बनाने पर विचार किया जाता है।

दो कॉलेजियम सिफारिशें रोकी गईं

भारत के मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मूल रूप से फरवरी में अपनी बैठक के दौरान पटना हाई कोर्ट की पीठ में पदोन्नति के लिए कुल 9 अधिवक्ताओं की सिफारिश की थी।

जहां केंद्र ने उस सूची में से 7 नामों को मंजूरी दे दी है, वहीं 2 प्रमुख अधिवक्ताओं की फाइलें अभी भी लंबित या रोकी हुई हैं:

  • मोहम्मद नदीम सेराज
  • संजीव कुमार
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केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा इस बात का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है कि बुधवार की अधिसूचना से इन दोनों नामों को क्यों बाहर रखा गया। कार्यपालिका द्वारा कॉलेजियम की सिफारिशों को अलग करने की प्रथा पहले भी न्यायपालिका और सरकार के बीच तनाव का मुद्दा रही है।

पटना हाई कोर्ट के रिक्ति संकट पर प्रभाव

पटना हाई कोर्ट लंबे समय से जजों की भारी कमी से जूझ रहा है, जिससे मामलों के निपटारे की दर प्रभावित हुई है और कोर्ट में मुकदमों का लंबित बैकलॉग बढ़ गया है।

इस नई नियुक्ति से कोर्ट में खाली पदों की संख्या में बड़ी कमी आएगी:

  • स्वीकृत पद: पटना हाई कोर्ट में जजों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या 53 है।
  • वर्तमान स्थिति: इस नियुक्ति से पहले कोर्ट में केवल 37 जज कार्यरत थे, यानी कुल 16 पद खाली पड़े थे।
  • नया समीकरण: अब 7 नए जजों के आने से कार्यरत जजों की कुल संख्या बढ़कर 44 हो जाएगी।
  • बची हुई रिक्तियां: इसके साथ ही खाली पदों की संख्या घटकर केवल 9 रह जाएगी।
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इन 7 नए जजों के कार्यभार संभालने से अत्यधिक काम के बोझ से दबी बेंच को काफी राहत मिलेगी। हालांकि, कानून विशेषज्ञों का मानना है कि सुचारू न्याय सुनिश्चित करने के लिए बची हुई 9 रिक्तियों को जल्द से जल्द भरना और लंबित पड़े 2 नामों को मंजूरी देना बेहद जरूरी है।

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