प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक महिला की आपत्तिजनक डीपफेक तस्वीरें तैयार कर उन्हें इंटरनेट पर प्रसारित करने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट शुक्रवार को तत्काल सुनवाई के लिए सहमत हो गया। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने की मंजूरी दी।
महिला ने अपनी याचिका में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल कर उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली मनगढ़ंत तस्वीरें बनाने और फैलाने का आरोप लगाया है। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई है कि डिजिटल मंचों से इन फर्जी और अपमानजनक सामग्रियों को तुरंत हटाया जाए और संबंधित लिंक ब्लॉक किए जाएं।
एफआईआर के बावजूद गिरफ्तारी न होने पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील उमेश शर्मा ने पीठ को बताया कि इस मामले में पहले ही एक प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराई जा चुकी है। इसके बावजूद जांच एजेंसियों ने अब तक जिम्मेदार लोगों को पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
वकील ने अदालत में दलील दी कि जिन वेब लिंक के जरिए ये फर्जी डीपफेक तस्वीरें लगातार साझा की जा रही हैं, उन्हें हटाने या ब्लॉक कराने की दिशा में भी प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन से निजी तस्वीर हासिल करने का आरोप
याचिका के अनुसार, नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के हालिया विरोध-प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं और उनके सहयोगियों ने याचिकाकर्ता की एक निजी तस्वीर हासिल की थी। याचिका में पार्टी नेता सौरव दास, अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह को नामजद किया गया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन नेताओं ने एआई फेस-स्वैपिंग टूल्स का सहारा लेकर याचिकाकर्ता के चेहरे को प्रधानमंत्री के साथ एक आपत्तिजनक तस्वीर पर लगा दिया और फिर उसे ऑनलाइन सर्कुलेट कर दिया। पीड़िता ने हाईकोर्ट से इस मानहानिकारक सामग्री को सभी सोशल मीडिया व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से तत्काल हटाने और प्रतिबंधित करने के कड़े निर्देश देने की मांग की है।

